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चंदौली के समूदपुर में भक्ति का महासंगम: संत समागम और हरिकथा में उमड़ा जनसैलाब

चंदौली के समूदपुर गांव में आयोजित संत समागम और हरिकथा कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती और स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती के प्रवचनों ने भक्तों को आध्यात्मिकता, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में भंडारे का भी आयोजन हुआ।

 
समूदपुर में भक्ति का महासंगम
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चंदौली: चहनियां क्षेत्र के समूदपुर गांव में शुक्रवार को आयोजित भव्य संत समागम और हरिकथा कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया। जय भारत मंच के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में क्षेत्र ही नहीं, आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरा वातावरण हरि नाम के जयघोष और संतों के प्रवचनों से भक्तिमय बना रहा।

संतों के प्रवचनों ने बांधा श्रद्धालुओं को

कार्यक्रम के मुख्य कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी महाराज ने हरिकथा के माध्यम से धर्म, संस्कृति और मानव जीवन के मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन का महत्व बताया।

कथा के दौरान श्रद्धालु पूरी तन्मयता के साथ कथा श्रवण करते रहे। कई लोग भावुक होकर भक्ति रस में डूबे नजर आए। पंडाल में मौजूद श्रद्धालु देर तक संतों के वचनों को सुनते रहे।

स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने दिया संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का संदेश

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती जी महाराज ने भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण पर अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि संत समाज केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं देता, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने का भी कार्य करता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

समाज को जोड़ने का माध्यम बने ऐसे आयोजन

कार्यक्रम के आयोजक, पूर्व ब्लॉक प्रमुख और सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र से मजबूत दावेदारी रखने वाले उपेन्द्रनाथ सिंह ‘गुड्डू’ ने संतों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज को जोड़ने और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य लोगों के भीतर आध्यात्मिक चेतना जगाने के साथ-साथ सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को भी मजबूत करता है। उन्होंने इसे धर्म और समाज सेवा को एक मंच पर लाने का प्रयास बताया।

“हरि बोल” और “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंजा पंडाल

हरिकथा के दौरान जैसे-जैसे भगवान की महिमा और धर्म की गाथाओं का वर्णन होता गया, पूरा पंडाल “हरि बोल” और “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंजता रहा। श्रद्धालु भक्ति में डूबकर कथा का आनंद लेते रहे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की उपस्थिति ने इसे जनआस्था का उत्सव बना दिया। कथा समाप्त होने के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ संतों का आशीर्वाद लेने के लिए लगी रही।

हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया भंडारा प्रसाद

कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और सेवा भावना की झलक देखने को मिली।

समूदपुर में आयोजित यह संत समागम और हरिकथा कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना का भी सशक्त संदेश देकर क्षेत्र में अपनी अलग छाप छोड़ गया।