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मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास: मोक्ष तीर्थ बनेगा काशी का अगला धार्मिक पर्यटन केंद्र

वाराणसी: मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास के बाद यह मोक्ष तीर्थ वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा। आधुनिक क्रेमाटोरियम, अलग पाथवे और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं के साथ काशी में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।

 
मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास
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वाराणसी: मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर भले ही धरोहरों के ध्वस्तीकरण का विवाद देशभर में चर्चा का विषय बना हो, लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद यह मोक्ष तीर्थ धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित होने की दिशा में अग्रसर है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के बाद यह काशी में धार्मिक पर्यटन का नया प्रमुख केंद्र बनेगा।

पूर्व में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नव्य-भव्य स्वरूप को लेकर भी इसी प्रकार के आरोप और विरोध सामने आए थे, जो समय के साथ स्वतः शांत हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास भी इसी क्रम में काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त करेगा।

काशी को मोक्ष नगरी और मणिकर्णिका घाट को मोक्ष तीर्थ की संज्ञा दी जाती है। मान्यता है कि इस महाश्मशान पर चिता की अग्नि कभी बुझती नहीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहीं श्रीहरि ने सुदर्शन चक्र से चक्र पुष्करिणी का निर्माण किया था और भगवान शिव के कान से गिरा मणिजड़ित कुंडल इस स्थल को मणिकर्णिका के नाम से विख्यात करता है। शास्त्रों में वर्णित है कि स्वयं महादेव यहां जीवात्मा को राम तारक मंत्र देकर भवबंधन से मुक्त करते हैं।

यहां जीवन और मृत्यु के दर्शन एक साथ होते हैं- एक ओर जलती चिताएं, तो दूसरी ओर सुर-ताल और घुंघरुओं की झंकार जीवन को पूर्णता से जीने का संदेश देती है। यही विरोधाभास देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं, आध्यात्मिक संतों और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

कोरोना काल से पहले मणिकर्णिका घाट विदेशी पर्यटकों की प्रमुख पसंद रहा है। पुनर्विकास योजना में इसी दृष्टि से शवयात्रियों और पर्यटकों के लिए अलग-अलग पाथवे बनाए जा रहे हैं। घाट पर 32 चिमनीयुक्त आधुनिक क्रेमाटोरियम विकसित किए जाएंगे, ताकि पर्यावरणीय प्रदूषण न्यूनतम रहे।

परियोजना के तहत पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षालय, शौचालय और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। यह कार्य बंगाल की रूपा फाउंडेशन द्वारा सीएसआर फंड से लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, सभी पौराणिक धरोहरों को उनके ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप संरक्षित किया जाएगा।

टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता का कहना है कि काशी विदेशी पर्यटकों की सूची में हमेशा शामिल रहती है और मणिकर्णिका घाट उनके लिए विशेष आकर्षण है। सुविधाओं के विकास के बाद यह घाट अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा।

वहीं जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के अनुसार, पुनर्विकास के बाद घाट स्वच्छ और सुव्यवस्थित होगा। शवदाह के दौरान निकलने वाले प्रदूषण से राहत मिलेगी, आधुनिक चिमनियां लगेंगी और एलिवेटेड प्लेटफॉर्म समेत श्रद्धालुओं के बैठने व प्रतीक्षा की बेहतर व्यवस्था होगी।