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संपूर्णानंद विश्वविद्यालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय के बीच MOU, जनजातीय क्षेत्रों के लिए शुरू होंगे विशेष डिप्लोमा कोर्स
 

 
 संपूर्णानंद विश्वविद्यालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय के बीच MOU, जनजातीय क्षेत्रों के लिए शुरू होंगे विशेष डिप्लोमा कोर्स
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नई दिल्ली। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। नई दिल्ली स्थित मंत्रालय में आयोजित समारोह के दौरान मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय में जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से विकसित प्रमाणपत्रीय और डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि एमओयू के बाद देश के जनजातीय समुदायों के समग्र शैक्षिक, सांस्कृतिक और मानवीय उत्थान की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी अध्याय जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के भविष्य को नई दिशा देने वाला दूरदर्शी राष्ट्रीय संकल्प है।

कुलपति ने बताया कि पाठ्यक्रमों को इस तरह तैयार किया जाएगा, जिससे जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विशिष्टता, मातृभाषाओं, परंपरागत ज्ञान और जीवन-मूल्यों का संरक्षण किया जा सके। वहीं, मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने कहा कि यह समझौता भारत सरकार की समावेशी विकास-दृष्टि का सशक्त प्रतीक है। समारोह में जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पाण्डेय और निदेशक दीपाली मसीर्कर भी मौजूद रहे।

गोद लिए गांवों में पहुंची संस्कृत विश्वविद्यालय की टीम

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय की ओर से गोद लिए गए पांच गांवों—मुनारी, तिवारीपुर, गोपपुर, गुरुवट और भोपापुर—के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देशन में आयोजित चित्रकला, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ‘मेरी मां’ विषय पर हुई प्रतियोगिताओं में छात्रों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा, अभिव्यक्ति क्षमता और भारतीय पारिवारिक मूल्यों के प्रति संवेदनशीलता का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम प्रो. दिनेश कुमार गर्ग की अध्यक्षता और डॉ. विजय कुमार शर्मा के निर्देशन में आयोजित हुआ। निर्णायक के रूप में डॉ. ज्ञानेंद्र सापकोटा और डॉ. अखिलेश कुमार ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रहा है।