नमो घाट बोटिंग विवाद: एक पक्ष मान रहा नियम, दूसरा चला रहा नाव? आरोप-प्रत्यारोप तेज
वाराणसी के नमो घाट पर नाव संचालन को लेकर निषाद समुदाय के दो गुटों में विवाद गहराता जा रहा है। प्रशासन के आदेश के बावजूद तनातनी जारी है। इस विवाद से करीब 500 परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है।
वाराणसी: नमो घाट पर नाव संचालन को लेकर निषाद समुदाय के दो गुटों—राजघाट और सराय मोहना के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पिछले तीन से चार महीनों से दोनों पक्ष फेज-1 और फेज-2 पर संचालन के अधिकार को लेकर आमने-सामने हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
प्रशासनिक बैठकों के बावजूद नहीं निकला हल
मामले को सुलझाने के लिए प्रशासन और बिरादरी स्तर पर कई बैठकों का आयोजन किया गया। हाल ही में एडीसीपी, एडीएम सिटी और एसीपी दशाश्वमेध की मौजूदगी में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि अंतिम फैसला आने तक नमो घाट के दोनों फेज पर किसी भी पक्ष द्वारा नाव संचालन नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस आदेश के पालन को लेकर अब विवाद और गहरा गया है।
एक पक्ष का आरोप, दूसरा कर रहा नियमों का उल्लंघन
सराय मोहना पक्ष के महेंद्र साहनी का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपनी नावें हटा ली हैं। वहीं, उनका आरोप है कि राजघाट के कुछ लोग आदेश की अनदेखी करते हुए अब भी नमो घाट फेज-1 पर नाव संचालन कर रहे हैं।
500 परिवारों की आजीविका पर संकट
इस विवाद का सबसे बड़ा असर नाविकों के परिवारों पर पड़ रहा है। महेंद्र साहनी के अनुसार, लगभग 500 परिवारों की रोजी-रोटी नाव संचालन पर ही निर्भर है। उन्होंने कहा, “हमारे बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर का खर्च इसी काम से चलता है। आदेश का पालन करने के बाद हम बेरोजगार बैठे हैं, जबकि दूसरा पक्ष कमाई कर रहा है।”
प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
पीड़ित पक्ष ने कमिश्नर और स्थानीय थाना अध्यक्ष को वीडियो और फोटो साक्ष्य के साथ शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जल्द समाधान की मांग की है, ताकि सभी नाविकों को समान अवसर मिल सके और उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।
मां गंगा निषाद राज सेवा समिति, आदिकेशव घाट के कई पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए जल्द समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
