काशी विद्यापीठ में आचार्य नरेन्द्र देव की 70वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, वैचारिक विरासत पर मंथन
Varanasi : महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं गांधी विमर्श केन्द्र, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में काशी विद्यापीठ के द्वितीय कुलपति आचार्य नरेन्द्र देव जी की 70वीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को 'भारतीय राजनीति में आचार्य नरेन्द्र देव का वैचारिक योगदान' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। डॉ. भगवान दास केन्द्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि आचार्य नरेन्द्र देव जी सम्पूर्ण भारत की धरोहर हैं।

कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि लगभग दो दशक से अधिक समय तक आचार्य नरेन्द्र देव जी ने काशी विद्यापीठ परिवार के अध्यक्ष एवं आचार्य दोनों की भूमिका का निर्वहन उस कठिन दौर में किया, जब कभी-कभी पूरा विश्वविद्यालय शिक्षकों एवं विद्यार्थियों सहित अंग्रेज सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाता था। लेकिन आचार्य नरेन्द्र देव जी जैसे लोगों ने अपनी ज्ञान-दर्शन से लगातार पठन-पाठन का वातावरण बनाए रखा और देश की आजादी की लड़ाई के योद्धा तैयार किए। इस अवसर पर कुलपति ने आचार्य नरेन्द्र देव जी पर विश्वविद्यालय द्वारा एक पुस्तक प्रकाशित करने की घोषणा की।
मुख्य अतिथि लोकतंत्र सेनानी विजय नारायण ने कहा कि एम.एन. राय और गांधी दोनों के विचार-दर्शन का समन्वित स्वरूप आचार्य जी में था। उन्होंने बौद्ध दर्शन से लेकर इतिहास बोध तक का सचेत कार्य किया। विश्वविद्यालय को वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष की भूमि बनाने वाले नरेन्द्र देव विद्यार्थियों को राजनीति में सक्रिय भूमिका अदा करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे।

मुख्य वक्ता प्रो. दीपक मलिक ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रस्थापनाओं के मुख्य संस्थापकों में से एक आचार्य नरेन्द्र देव थे। वर्ष 1950 में लिखे एक लेख में आचार्य नरेन्द्र जी ने लिखा था कि लोकतंत्र शासन पद्धति नहीं बल्कि जीवन प्रणाली है और लोकतंत्र का प्राणवायु समाजवाद है इसलिए एक लोकतंत्री समाजवाद जो राष्ट्रीयता की भावना से ओत-प्रोत हो, की स्थापना समय की मांग है।
अन्य वक्ताओं प्रो. सुरेंद्र प्रताप, कुंवर सुरेश और डॉ. सनत सिंह ने कहा कि नैतिकता आचार्य जी की मूल पूंजी थी। भाषा, इतिहास, समाज और संस्कृति को समन्वित कर उन्होंने एक चतुर्भुज निर्मित किया, जो भारत की मौलिक वैचारिकी है।

स्वागत भाषण महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह ने दिया। विषय प्रस्ताव रोहित राणा ने रखा, संचालन डॉ. शम्मी कुमार सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन युवराज पांडेय ने किया। इस अवसर पर सहायक कुलानुशासक डॉ. अमरीश राय, राधेश्याम, दुर्गा श्रीवास्तव, रविभान सिंह, मो. अजीम, प्रेम प्रकाश गुप्ता, शिवजनक गुप्ता, शिवम यादव, ऋषभ पांडेय, जतिन पटेल, धीरज सोनकर, राहुल मिश्र, मुरारी यादव आदि उपस्थित रहे।
