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काशी विद्यापीठ में ट्रांसजेंडर और LGBTQ+ विषयों पर राष्ट्रीय कार्यशाला, शोध पद्धति और नैतिकता पर हुआ मंथन

 
काशी विद्यापीठ में ट्रांसजेंडर और LGBTQ+ विषयों पर राष्ट्रीय कार्यशाला, शोध पद्धति और नैतिकता पर हुआ मंथन
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Varanasi : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में रविवार को ट्रांसजेंडर एवं LGBTQ+ समुदायों से जुड़े विषयों पर शोध कर रहे शोधार्थियों के लिए राष्ट्रीय एक-दिवसीय क्षमता-वर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में वाराणसी, लखनऊ और प्रयागराज से आए 10 पीएचडी शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य, अनुभव और शोध के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रस्तुतियां दीं।

कार्यशाला का आयोजन ट्रांसजेंडर सेल, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, प्रिज्मैटिक फाउंडेशन वाराणसी और स्पेक्ट्रम LGBTQIA+ क्लब, वसंता कॉलेज फॉर वुमेन, राजघाट के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर एवं LGBTQ+ विषयों पर कार्य कर रहे शोधार्थियों और उनके शोध निदेशकों की शोध पद्धति संबंधी क्षमता को विकसित करना था।

शोधार्थियों को साझा अकादमिक मंच उपलब्ध कराना उद्देश्य

ट्रांसजेंडर सेल के समन्वयक प्रो. संजय ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल और कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि राज्यपाल के निर्देश पर कुलपति द्वारा जुलाई 2023 में विश्वविद्यालय में ट्रांसजेंडर सेल की स्थापना की गई थी। इसके बाद से सेल ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के प्रति जागरूक करने और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य ट्रांसजेंडर मुद्दों, LGBTQ+ पहचानों, जेंडर, मर्दानगी और यौनिकता जैसे विषयों पर शोध कर रहे शोधार्थियों को साझा अकादमिक मंच उपलब्ध कराना है। यहां शोधार्थी अपने अनुभव, चुनौतियां और शोध की सीमाएं विशेषज्ञों के साथ साझा कर सकें तथा संख्यात्मक, गुणात्मक और मिश्रित शोध पद्धतियों, उत्तरदाताओं के चयन, साक्षात्कार और शोध नैतिकता की बेहतर समझ विकसित कर सकें।

10 पीएचडी शोधार्थियों ने प्रस्तुत किया अपना शोध

कार्यशाला में वाराणसी, लखनऊ और प्रयागराज से आए 10 पीएचडी शोधार्थियों ने अपने शोध कार्यों की प्रस्तुति दी। इस दौरान LGBTQ+ समुदायों से संबंधित सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, कानूनी, संस्थागत और सामुदायिक मुद्दों पर चर्चा हुई।

रिसोर्स पर्सन के रूप में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय की प्रो. मधु कुशवाहा ने शोधार्थियों के सवालों पर चर्चा करते हुए शोध की नैतिकता, शोध पद्धति, समुदाय के साथ जुड़ाव, शोधकर्ता की भूमिका, गोपनीयता, संस्थागत चुनौतियों और समुदाय आधारित शोध के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।

वसंता कॉलेज में चल रहा ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स

विशेष वक्ता वसंता कॉलेज फॉर वुमेन, राजघाट की डॉ. रचना पांडेय ने ट्रांसजेंडर विषय पर शोध के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कॉलेज में संचालित स्पेक्ट्रम LGBTQIA+ क्लब के बारे में बताते हुए कहा कि वसंता कॉलेज में ट्रांसजेंडर विषय पर एक एडेड सर्टिफिकेट कोर्स भी संचालित किया जा रहा है, जिसे विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं।

प्रिज्मैटिक फाउंडेशन की नीति ने कहा कि LGBTQIA+ और ट्रांसजेंडर समुदायों पर होने वाला शोध केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समुदाय के वास्तविक अनुभवों और सामुदायिक ज्ञान से उसका सार्थक संबंध होना चाहिए। उन्होंने शोध में प्रतिभागियों की गरिमा, गोपनीयता, सहमति और सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

छह महीने के भीतर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला की योजना

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रो. जय सिंह ने कहा कि ऐसे अकादमिक मंच शोधार्थियों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने, नए शोध प्रश्न विकसित करने और भविष्य में सहयोगात्मक शोध की संभावनाएं तलाशने का अवसर देते हैं।

कार्यशाला के समापन पर LGBTQ+ एवं ट्रांसजेंडर विषयों पर शोधार्थियों और अकादमिक विशेषज्ञों के बीच निरंतर संवाद एवं सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही आगामी छह महीने के भीतर एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करने की योजना भी तय की गई।