काशी में अब नहीं दिखेंगी मीट-मछली की दुकानें! नगर निगम का बड़ा फैसला, शहर से बाहर होंगे सभी बाजार
वाराणसी। काशी में मीट, मांस और मछली बेचने वाले कारोबारियों को जल्द ही शहर की सीमा के बाहर जाना पड़ सकता है। वाराणसी नगर निगम की बैठक में इस संबंध में बड़ा फैसला लिया गया है। तय किया गया है कि शहर के भीतर संचालित सभी मीट, मांस और मछली बाजारों को चरणबद्ध तरीके से शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाएगा।
नगर निगम की योजना के अनुसार इन दुकानों और बाजारों को रामनगर, सूजाबाद, गनेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्र में विकसित किए जाने वाले नए स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा।
नगर निगम की बैठक में लिया गया फैसला
नगर निगम सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के बाद प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। अधिकारियों का मानना है कि काशी विश्वनाथ धाम और अन्य धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए शहर के भीतर कच्चे मीट और मछली के बाजारों को व्यवस्थित करना जरूरी हो गया है।
नगर निगम का कहना है कि धार्मिक नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं को कई जगहों पर इन दुकानों के कारण असुविधा होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बाजारों को शहर की सीमा से बाहर विकसित करने की योजना बनाई गई है।
पिछले साल उठी थी मांग
यह मुद्दा पहली बार पिछले वर्ष नगर निगम सदन में जोर-शोर से उठा था। पार्षद गुलशन अली ने मीट और मछली बाजारों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की थी।
उन्होंने कहा था कि सावन महीने में धार्मिक कारणों से कई बार दुकानें बंद करनी पड़ती हैं, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यदि बाजारों को अलग स्थान पर विकसित किया जाए तो व्यापारियों और आम लोगों दोनों को सुविधा मिलेगी।
नवरात्र तक शिफ्टिंग की तैयारी
नगर निगम सूत्रों के मुताबिक प्रशासन नवरात्र तक इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए प्रस्तावित स्थानों का चयन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं शुरू की जा रही हैं। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो शहर के भीतर संचालित मीट और मछली की अधिकांश दुकानें नए स्थानों पर स्थानांतरित कर दी जाएंगी।
काशी में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या
दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 29 करोड़ 80 लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं।
केवल पिछले 60 दिनों में ही एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए हैं। इसी बढ़ती संख्या को देखते हुए शहर की व्यवस्थाओं में बदलाव किए जा रहे हैं।
धार्मिक महत्व के चलते लिया जा रहा निर्णय
काशी विश्वनाथ मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में मृत्यु होने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
हजारों वर्षों से काशी धर्म, संस्कृति, अध्यात्म और ज्ञान की नगरी के रूप में पहचान रखती है। नगर निगम का मानना है कि शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है।
क्या होगा आगे?
नगर निगम अब प्रस्तावित स्थानों पर आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से मीट, मांस और मछली बाजारों को शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाएगा। हालांकि इस संबंध में अंतिम कार्ययोजना और समयसीमा पर जल्द विस्तृत जानकारी जारी की जा सकती है।
