सैलरी नहीं तो काम नहीं! वेतन न मिलने पर 500 सफाईकर्मी धरने पर, दो महीने की वेतन अटकी
वाराणसी: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े करीब 500 कर्मियों ने वेतन न मिलने के विरोध में अचानक काम बंद कर दिया। गुरुवार सुबह सभी हेल्पर और वाहन चालक आदमपुर जोन स्थित धनेसरा डंपिंग यार्ड में इकट्ठा होकर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना था कि अप्रैल का अधिकांश समय बीत जाने के बावजूद उनके खातों में वेतन नहीं पहुंचा है। इस अचानक हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा और कई इलाकों में कचरा उठान बाधित हो गया।
डंपिंग यार्ड में खड़ी रहीं गाड़ियां, कचरा निस्तारण रुका
हड़ताल के चलते कई डंपर और छोटी गाड़ियां यार्ड में ही खड़ी रह गईं। कूड़ा करसड़ा स्थित डंपिंग प्लांट तक नहीं पहुंच सका, जिससे व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। स्थानीय स्तर पर सफाई कार्य रुकने से हालात बिगड़ने की आशंका भी बढ़ गई थी।
दो महीने से वेतन बकाया
धरने में शामिल कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें लंबे समय से नियमित वेतन नहीं मिल रहा है। कुछ कर्मचारियों के खातों में आंशिक राशि ही आई, जबकि पूरी तनख्वाह अब तक नहीं दी गई। कर्मचारियों का कहना था कि लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन भुगतान नहीं हो रहा। इससे उनके सामने रोजमर्रा के खर्च और परिवार चलाने की समस्या खड़ी हो गई है।
पुलिस और प्रशासन मौके पर, समझाने में जुटे अधिकारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने कर्मचारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारी तत्काल भुगतान की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद नगर निगम की ओर से जिम्मेदार अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों से संवाद स्थापित किया।
पहले दो दिन, फिर शाम तक भुगतान का आश्वासन
नगर निगम की ओर से अपर नगर आयुक्त सविता यादव ने कर्मचारियों को वेतन भुगतान का भरोसा दिलाया। पहले दो दिन में सैलरी आने की बात कही गई, लेकिन कर्मचारियों ने तत्काल भुगतान की मांग पर जोर दिया। स्थिति को देखते हुए अंततः प्रशासन ने उसी दिन शाम तक वेतन जारी करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद कर्मचारी काम पर लौटने के लिए तैयार हो गए और धरना समाप्त हुआ।
परिवार और बच्चों की पढ़ाई पर असर की चिंता
कर्मचारियों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वेतन न मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्च प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना था कि समय पर भुगतान न होने से आर्थिक संकट गहरा रहा है।
