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गंज शहीदां मस्जिद खाली करने के नोटिस की अवधि खत्म, 20 जून तक की उत्तर रेलवे ने दी थी मोहलत

वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन पर चल रहे 350 करोड़ रुपये के मेगा विकास प्रोजेक्ट के बीच गंज शहीदां मस्जिद को लेकर विवाद गहरा गया है। रेलवे द्वारा जारी नोटिस की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद को ऐतिहासिक बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
 
गंज शहीदां मस्जिद
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वाराणसी: काशी रेलवे स्टेशन के मेजर अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट के बीच गंगा कॉलोनी स्थित गंज शहीदां मस्जिद को हटाने के लिए उत्तर रेलवे प्रशासन द्वारा जारी नोटिस की अवधि शनिवार को समाप्त हो गई। रेलवे का दावा है कि मस्जिद रेलवे की भूमि पर बनी है और स्टेशन के लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत वाले विकास कार्य में बाधा बन रही है। अब सभी की निगाहें रेलवे और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

रेलवे ने मस्जिद को बताया अवैध निर्माण

रेलवे अधिकारियों के अनुसार काशी रेलवे स्टेशन के प्रथम प्रवेश द्वार और सर्कुलेटिंग एरिया के पास स्थित गंज शहीदां मस्जिद रेलवे भूमि पर निर्मित है। स्टेशन के मेजर अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट के तहत इस क्षेत्र का पुनर्विकास किया जाना है, जिसके चलते रेलवे ने मस्जिद हटाने का निर्णय लिया।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि मस्जिद से जुड़ा मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। मूल वाद संख्या 1174/1991, अंजुमन इंतेजामिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, सिविल जज (जूनियर डिवीजन) शहर वाराणसी की अदालत में चल रहा था, जिसे 28 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया गया था।

रेलवे का दावा- कोर्ट से राहत नहीं मिली

रेल अधिकारियों के मुताबिक अदालत द्वारा वाद खारिज किए जाने के बाद इंतेजामिया कमेटी को उच्च न्यायालय में अपील करने की सलाह भी दी गई थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसी बीच काशी रेलवे स्टेशन के व्यापक आधुनिकीकरण कार्य शुरू हो गए।

रेलवे का कहना है कि विकास परियोजना के तहत गंगा कॉलोनी क्षेत्र का भी पुनर्गठन प्रस्तावित है, जहां यह मस्जिद स्थित है। इसी के मद्देनजर नोटिस जारी कर 20 जून तक मस्जिद हटाने का अनुरोध किया गया था।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार अब जिला प्रशासन, पुलिस और अन्य विभागों के साथ समन्वय बनाकर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

मुस्लिम पक्ष ने नोटिस पर उठाए सवाल

वहीं अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन ने रेलवे के दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि रेलवे द्वारा जारी नोटिस में न तो किसी अधिकारी के हस्ताक्षर हैं और न ही जारी करने की तिथि अंकित है।

उन्होंने दावा किया कि जिस मुकदमे का उल्लेख नोटिस में किया गया है, वह मस्जिद से संबंधित नहीं था, बल्कि मस्जिद के बाहर पूर्व दिशा की भूमि से जुड़ा मामला था। इसलिए मस्जिद को उस मुकदमे से जोड़ना भ्रामक है।

मस्जिद को बताया रेलवे से भी पुराना

एस.एम. यासीन ने दावा किया कि गंज शहीदां मस्जिद का निर्माण वर्ष 1034 में हुआ था और इसका उल्लेख 1883-84 के बंदोबस्ती रिकॉर्ड तथा पुराने नक्शों में भी दर्ज है।

उनका कहना है कि राजघाट क्षेत्र में रेलवे का आगमन वर्ष 1887 में हुआ था, जबकि मस्जिद उससे पहले से मौजूद है। उन्होंने यह भी दावा किया कि न्यायालय में दाखिल अपने शपथ पत्र में रेलवे प्रशासन ने मस्जिद के अस्तित्व और मुस्लिम समुदाय की मिल्कियत को स्वीकार किया था।