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अब जेल में सिर्फ सजा नहीं, पढ़ाई भी... वाराणसी सेंट्रल जेल में कैदी सीखेंगे फैशन डिजाइनिंग, कंप्यूटर और योग जैसे 40 कोर्स

वाराणसी सेंट्रल जेल में कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र खोला जाएगा। यहां फैशन डिजाइनिंग, कंप्यूटर, योग, मेडिकल और फिजियोथेरेपी समेत 40 नियमित और व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित होंगे, जिससे सजा पूरी होने के बाद रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।

 
वाराणसी सेंट्रल जेल
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वाराणसी: सेंट्रल जेल में बंद कैदियों को अब सिर्फ सजा नहीं, बल्कि नई शुरुआत का भी मौका मिलेगा। जेल प्रशासन कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ी पहल करने जा रहा है। इसके तहत राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र सेंट्रल जेल परिसर में खोला जाएगा, जहां कैदी नियमित पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़े प्रोफेशनल कोर्स भी कर सकेंगे।

40 नियमित और व्यावसायिक पाठ्यक्रम होंगे शुरू

जेल अधीक्षक आर.के. मिश्रा ने बताया कि अध्ययन केंद्र में कुल 40 नियमित और व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इनमें फैशन डिजाइनिंग, टेक्सटाइल डिजाइनिंग, कंप्यूटर, मेडिकल, योग, फिजियोथेरेपी समेत कई रोजगारपरक कोर्स शामिल होंगे। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य कैदियों को ऐसा कौशल देना है, जिससे वे जेल से बाहर आने के बाद सम्मानजनक रोजगार या स्वरोजगार शुरू कर सकें।

IGNOU के बाद अब राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय की पहल

इससे पहले सेंट्रल जेल में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के माध्यम से कुछ व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाते थे। हालांकि समय के साथ अधिकांश कोर्स बंद हो गए, जिससे कैदियों के लिए प्रशिक्षण के अवसर सीमित हो गए थे। अब इस कमी को दूर करने के लिए राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय ने आगे कदम बढ़ाया है।

निरीक्षण के बाद मिली मंजूरी

विश्वविद्यालय की टीम जेल का निरीक्षण कर चुकी है और अध्ययन केंद्र खोलने की अनुमति भी दे दी गई है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जल्द ही यहां प्रवेश प्रक्रिया और कक्षाएं शुरू की जाएंगी।

सजा के बाद नई जिंदगी की तैयारी

जेल प्रशासन का मानना है कि शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से कैदियों में सकारात्मक बदलाव आएगा। पढ़ाई के साथ रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलने से वे जेल से रिहा होने के बाद आसानी से रोजगार हासिल कर सकेंगे या अपना काम शुरू कर पाएंगे।