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जनगणना विवाद: OBC के लिए अलग कॉलम न होने पर सरकार पर गंभीर आरोप, आंदोलन की चेतावनी

जनगणना 2027 को लेकर OBC कॉलम न होने पर विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय पिछड़ा मुक्ति मोर्चा ने इसे पिछड़े वर्गों के साथ धोखा बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और देशव्यापी आंदोलन व भारत बंद की चेतावनी दी है।

 
varanasi
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वाराणसी: आगामी जनगणना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय पिछड़ा मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ राजेंद्र पटेल ने जनगणना में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए अलग कॉलम न दिए जाने पर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जारी अधिसूचना में ओबीसी के लिए अलग जाति कॉलम का अभाव पिछड़े वर्गों के साथ धोखेबाजी है।

78 साल बाद भी नहीं मिला न्याय

डॉ. पटेल ने कहा कि देश की आजादी के करीब 78 वर्ष और संविधान लागू होने के 75 वर्ष बाद भी पिछड़े वर्गों को उनका हक नहीं मिल पाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए सटीक और पारदर्शी आंकड़ों की आवश्यकता होती है।

डेटा के अभाव पर उठाए सवाल

उनका कहना है कि अब तक ओबीसी समुदाय की वास्तविक जनसंख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़ा समग्र डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे नीतिगत फैसलों पर असर पड़ता है।

कैबिनेट मंजूरी के बाद भी विवाद

डॉ. पटेल ने बताया कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार की कैबिनेट ने 2027 की जनगणना में व्यापक जाति आधारित गणना को मंजूरी दी थी।

हालांकि, 22 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के तहत हाउस-लिस्टिंग चरण की प्रश्नावली में ओबीसी और अन्य जातियों के लिए अलग कॉलम शामिल नहीं किया गया। इसमें केवल परिवार के मुखिया को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या “अन्य” श्रेणी में वर्गीकृत करने का विकल्प दिया गया है।

यह प्रशासनिक चूक नहीं, साजिश’

उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक चरण में ही ओबीसी से जुड़े आंकड़े नहीं जुटाए जाएंगे, तो उनकी वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाएगी। इसे उन्होंने मात्र प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि पिछड़े वर्गों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश बताया।

देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

मामले को लेकर संगठन ने कड़ा रुख अपनाते हुए देशभर में चरणबद्ध आंदोलन और भारत बंद की तैयारी की घोषणा की है।

संगठन की मांग है कि आगामी जनगणना में ओबीसी समेत सभी जातियों के लिए अलग-अलग कॉलम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि वास्तविक आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय किया जा सके।