गुरु पूर्णिमा पर काशी में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, पातालपुरी मठ में 25 मुस्लिम श्रद्धालुओं ने ली गुरु दीक्षा
वाराणसी: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्म की नगरी काशी में आस्था की अनोखी तस्वीर देखने को मिली। वाराणसी के प्रसिद्ध पातालपुरी मठ में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुस्लिम समाज के 25 से अधिक श्रद्धालुओं ने सनातन परंपरा के अनुसार गुरु दीक्षा ग्रहण की। जगद्गुरु बालक देवाचार्य के सानिध्य में हुए इस आयोजन ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब को एक बार फिर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
सनातन परंपरा के अनुसार मुस्लिम श्रद्धालुओं ने की गुरु पूजा
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पातालपुरी मठ में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वाराणसी के अलावा गाजीपुर, मिर्जापुर और आसपास के कई जिलों से लोग गुरु दर्शन के लिए पहुंचे।
कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम श्रद्धालुओं ने सनातन परंपरा के अनुसार गुरु पूजन और आरती में हिस्सा लिया। गुरु मंत्र ग्रहण करने के बाद सभी श्रद्धालुओं ने महंत बालकदास की आरती की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
पहले से जुड़े थे कई श्रद्धालु, कुछ ने पहली बार ली दीक्षा
पातालपुरी मठ में गुरु दीक्षा लेने वाले कई मुस्लिम श्रद्धालु पहले से ही मठ की परंपरा से जुड़े हुए थे। वहीं, कुछ श्रद्धालुओं ने पहली बार गुरु मंत्र ग्रहण किया। मठ परिसर में पूरे विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के साथ गुरु पूर्णिमा का आयोजन किया गया। इस दौरान भक्तों ने अपने गुरु के प्रति श्रद्धा और विश्वास व्यक्त किया।
काशी की गंगा-जमुनी तहजीब का दिखा सुंदर स्वरूप
कार्यक्रम में मुस्लिम समाज की भागीदारी लोगों के बीच चर्चा का विषय रही। श्रद्धालुओं का कहना था कि काशी हमेशा से प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे की पहचान रही है।
पातालपुरी मठ में आयोजित यह कार्यक्रम विभिन्न समुदायों के बीच एकता और धार्मिक सौहार्द का संदेश देने वाला साबित हुआ। इस आयोजन ने यह दिखाया कि काशी में आस्था और सम्मान की भावना जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर है।
सतुआ बाबा आश्रम में भी हुआ गुरु दीक्षा कार्यक्रम
वहीं, वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम में भी गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। आश्रम में महंत संतोष दास ने भक्तों को गुरु मंत्र प्रदान किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु का आशीर्वाद लिया और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। काशी के विभिन्न मठों और आश्रमों में गुरु पूर्णिमा पर दिनभर आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहा।
