पहड़िया मंडी बदहाल: गंदगी, जलभराव और घंटों जाम से व्यापारी परेशान; महामंत्री ने लगाए गंभीर आरोप
वाराणसी। पूर्वांचल की प्रमुख मंडियों में शामिल पहड़िया नवीन मंडी की बदहाल व्यवस्था को लेकर व्यापारियों में नाराजगी है। बनारस ग्लोबल टाइम्स (BGT) की ग्राउंड रिपोर्ट में मंडी परिसर के कई हिस्सों में गंदगी, जलभराव, खुले नाले और सड़े हुए फल-सब्जियों के ढेर नजर आए। व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
BGT से खास बातचीत में पहड़िया मंडी के महामंत्री ने मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जिस मंडी को पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडियों में गिना जाता है, वहां आज बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
खुली नालियों और जलभराव से बढ़ी परेशानी
महामंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व डीडीसी संजय कुमार सिंह के कार्यकाल में नालियों को खुलवाया गया, लेकिन उन पर ढक्कन की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते जगह-जगह गंदगी जमा हो रही है।
उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में भी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो रही। कई स्थानों पर पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। वहीं सड़े हुए आलू, प्याज और अन्य फल-सब्जियों के कारण परिसर में दुर्गंध बनी रहती है।
40 साल पुरानी मंडी में कूड़ा घर तक नहीं होने का दावा
महामंत्री के अनुसार, पहड़िया मंडी करीब 40 वर्ष पुरानी है, लेकिन आज तक यहां स्थायी कूड़ा निस्तारण केंद्र या कूड़ा घर की समुचित व्यवस्था नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी में बिना उचित लेआउट प्लान के निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। साथ ही मंडी की जमीन पर 14 शौचालय बनाए जाने का दावा करते हुए सवाल उठाया कि व्यापारियों की मूलभूत जरूरतों और व्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है।
इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि बनारस ग्लोबल टाइम्स नहीं करता है।
सफाई व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
महामंत्री ने दावा किया कि मंडी की सफाई के लिए नगर निगम को हर महीने करीब 5.5 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। कागजों पर करीब 30 सफाई कर्मचारियों की तैनाती बताई जाती है, लेकिन मौके पर लगभग 10 कर्मचारी ही नियमित रूप से दिखाई देते हैं।
उन्होंने सफाई व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभाग और ठेकेदार का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
मंडी से निकलने में लग रहे घंटों, कारोबार प्रभावित
व्यापारियों के मुताबिक, पहड़िया मंडी में जाम की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। महामंत्री ने दावा किया कि बाइक से मंडी गेट पार करने में कई बार डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं, जबकि मालवाहक वाहनों को मंडी से बाहर निकलने में चार से पांच घंटे तक का समय लग सकता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अव्यवस्थाओं और सुविधाओं की कमी के कारण मंडी का बड़ा हिस्सा व्यापार दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुका है और अब पहले की तुलना में बेहद सीमित कारोबार ही बचा है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव
महामंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी मंडी में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उनके मुताबिक, लंबे समय तक कोई स्वास्थ्यकर्मी मंडी परिसर में दिखाई नहीं देता और आपात स्थिति में व्यापारियों तथा मजदूरों को बाहर की स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है।
मुख्यमंत्री से लेकर अधिकारियों तक शिकायत का दावा
महामंत्री का कहना है कि मंडी की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय, विभागीय डायरेक्टर और नगर आयुक्त समेत कई स्तरों पर लिखित शिकायत भेजी जा चुकी है।
उन्होंने दावा किया कि अपने आरोपों के समर्थन में वह शपथ पत्र भी दे चुके हैं और स्पष्ट किया है कि यदि आरोप गलत साबित हों तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके बावजूद करीब आठ महीने बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
महामंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात का समय तक नहीं मिल रहा है।
‘आदर्श मंडी’ के दावे पर सवाल
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थित इस मंडी को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के दावों के बीच जमीनी हालात कई सवाल खड़े कर रहे हैं।
बनारस ग्लोबल टाइम्स के रिपोर्टर बृहस्कीपति राज पाण्डेय ग्राउंड रिपोर्ट में व्यापारियों ने प्रशासन से सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने, जलभराव खत्म करने, जाम से राहत दिलाने, निर्माण कार्यों की जांच कराने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
अब देखना होगा कि व्यापारियों की शिकायतों और लगाए गए गंभीर आरोपों पर संबंधित विभाग क्या रुख अपनाता है और पहड़िया मंडी की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
