मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास विवाद पर PMO-CMO का संज्ञान, विकास के साथ धरोहर संरक्षण के निर्देश
मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास के दौरान अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति से जुड़े विवाद पर पीएमओ और सीएमओ ने संज्ञान लिया है। प्रशासन को विकास के साथ धरोहर संरक्षण के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि सभी मूर्तियां सुरक्षित हैं और पुनर्विकास के बाद सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित की जाएंगी।
वाराणसी: महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चल रही पुनर्विकास परियोजना के दौरान एक प्राचीन मढ़ी (चबूतरा) ध्वस्त किए जाने और मलबे में राजमाता अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति व कलाकृतियों के दिखाई देने का वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। विवाद बढ़ने पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने भी संज्ञान लेते हुए प्रशासन को विकास कार्यों के साथ ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति समेत अन्य सभी धरोहरों को कोई क्षति नहीं पहुंची है। संरक्षण की दृष्टि से सभी मूर्तियों को संस्कृति विभाग के परिसर में सुरक्षित रख दिया गया है। पुनर्विकास कार्य पूर्ण होने के बाद इन्हें पंचायत उपयुक्त स्थल पर सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित किया जाएगा।
इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला। खरगे ने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक विरासतों को मिटाकर केवल “नेमप्लेट” लगाने की राजनीति हो रही है, जबकि अखिलेश यादव ने कहा कि - अविनाशी काशी ही भाजपा के विनाश का कारण बनेगी।
स्थानीय स्तर पर भी विरोध देखने को मिला। पाल समिति के अध्यक्ष महेंद्र पाल पिंटू ने समर्थकों के साथ प्रदर्शन कर कहा कि विकास के नाम पर धरोहरों को हटाना गलत है। घाट के चच्छन गुरु ने आरोप लगाया कि पुनर्विकास के नाम पर मणिकर्णिका घाट का मूल अस्तित्व खत्म किया जा रहा है और स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।
इस बीच बुधवार को होलकर वंश के प्रतिनिधि यशवंत राव तृतीय बनारस पहुंचे और मणिकर्णिका घाट का निरीक्षण किया। उन्होंने मंडलायुक्त एस. राजलिंगम और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल से मुलाकात कर मूर्तियों के संरक्षण को लेकर चिंता जताई।
उल्लेखनीय है कि मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को किया था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
