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रविन्द्र जायसवाल के बयान पर गरमाई सियासत, सपा ने पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन; मंत्री को बर्खास्त करने की उठाई मांग
 

 
 रविन्द्र जायसवाल के बयान पर गरमाई सियासत, सपा ने पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन; मंत्री को बर्खास्त करने की उठाई मांग
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वाराणसी। प्रदेश सरकार के स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क तथा पंजीयन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल के बयान को लेकर प्रदेश की राजनीति में विवाद गहरा गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही मंत्री पद से बर्खास्त किए जाने की भी मांग उठाई।

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सपा की ओर से दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि चंदौली दौरे के दौरान राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए "ससुरा" जैसे अपमानजनक शब्द का प्रयोग किया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। पार्टी ने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

ज्ञापन में कहा गया कि भाजपा नेताओं द्वारा लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए जा रहे हैं, जिससे समाज में वैमनस्य का माहौल बन रहा है और पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। सपा ने मांग की कि यदि राज्य मंत्री सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं तो उन्हें तत्काल मंत्रीमंडल से बर्खास्त किया जाए।

इस दौरान सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा, सपा जिलाध्यक्ष सुजीत यादव 'लक्कड़ पहलवान', लोहिया वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष दीपचंद गुप्ता, पूर्व विधायक उदय लाल मौर्य समेत समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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मीडिया से बातचीत में सपा नेताओं ने राज्यपाल से अपील करते हुए कहा कि राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल को तत्काल मंत्री पद से बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ उचित कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि मंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।

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मंत्री ने क्या कहा था?

इससे पहले चंदौली दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि वह केवल एक विशेष वर्ग के वोट बैंक की राजनीति करते हैं।

उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब सरकार कब्रिस्तानों की बाउंड्री कराने का प्रस्ताव लेकर आई थी। उनका दावा था कि उन्होंने उस समय सुझाव दिया था कि यदि कब्रिस्तानों की सुरक्षा के लिए बाउंड्री कराई जा रही है तो हिंदू समाज के श्मशान घाटों का भी समान रूप से विकास और संरक्षण किया जाना चाहिए, लेकिन तत्कालीन सरकार ने श्मशान घाटों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं कराई।

रविन्द्र जायसवाल ने समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं, उनके बयान में प्रयुक्त कुछ शब्दों को लेकर अब राजनीतिक विवाद तेज हो गया है और विपक्ष ने इसे राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताया है।