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पूर्वांचल को मिली नई औद्योगिक जिंदगी, सरकार की पहल से हजारों युवाओं को मिलेगा काम

 
पूर्वांचल को मिली नई औद्योगिक जिंदगी, सरकार की पहल से हजारों युवाओं को मिलेगा काम
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Lucknow : पूर्वांचल के जिलों में लंबे समय से जारी पलायन की समस्या पर अब लगाम लगने की उम्मीद जगी है। वाराणसी समेत आसपास के जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों की स्थापना की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार और औद्योगिक संगठनों की पहल से वाराणसी, गाजीपुर और चंदौली में बड़े स्तर पर औद्योगिक विकास की योजनाएं आकार ले रही हैं।

वाराणसी में नया इंडस्ट्रियल एरिया

वाराणसी के शहंशाहपुर क्षेत्र में शहर से दूर पशुपालन विभाग की खाली पड़ी करीब 188 एकड़ जमीन पर नया इंडस्ट्रियल एरिया विकसित किया जाएगा। यहां लगभग 100 फैक्ट्रियों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

गाजीपुर में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

गाजीपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के किनारे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा मुहम्मदाबाद तहसील के 13 गांवों में करीब 1000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इससे न सिर्फ उद्योग लगेंगे, बल्कि किसानों को बेहतर मुआवजा और फसलों के लिए नया बाजार भी मिलेगा। इससे जिले के पिछड़े इलाकों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।

चंदौली में औद्योगिक पार्क

चंदौली जिले में पीडीडीयू नगर–चकिया मार्ग पर चंदाइत क्षेत्र में औद्योगिक पार्क बनाया जाएगा। रामनगर औद्योगिक एसोसिएशन की पहल पर आपसी सहमति से 50 एकड़ जमीन की खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यहां करीब 75 औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जा सकेंगी।

कभी उद्योगों से गुलजार था पूर्वांचल

पूर्वांचल का औद्योगिक इतिहास काफी समृद्ध रहा है।

- वाराणसी: 1949 में चांदपुर, 1969 में रामनगर और 2001 में करखियांव में औद्योगिक क्षेत्र विकसित हुए।
- गाजीपुर: नंदगंज में 2015 में औद्योगिक क्षेत्र बना, लेकिन सुविधाओं का अभाव रहा।
- जौनपुर: सतहरिया औद्योगिक क्षेत्र की कई इकाइयां बंद हो चुकी हैं।
- आजमगढ़: 1964 में बने औद्योगिक आस्थान से अपेक्षित रोजगार नहीं मिल पा रहा।
- मऊ: 1994 में ताजोपुर में बने औद्योगिक क्षेत्र के कई कारखाने बंद हैं।
- मिर्जापुर: 1962 में बने औद्योगिक आस्थान में अब विस्तार की जगह नहीं बची है।
- भदोही: कारपेट सिटी के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
- बलिया: नरही और माधोपुर औद्योगिक क्षेत्र, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के बाद विकसित होने की उम्मीद में हैं।

उम्मीद की नई किरण

नई औद्योगिक योजनाओं से पूर्वांचल में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वर्षों से जारी पलायन की समस्या पर ब्रेक लगने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर उद्योगों के विस्तार से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा मिल सकती है।