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BHU परीक्षा में पूछा गया ‘ब्राह्मणवाद’ से जुड़ा प्रश्न, इतिहासकारों ने उठाए सवाल
 

 
 BHU परीक्षा में पूछा गया ‘ब्राह्मणवाद’ से जुड़ा प्रश्न, इतिहासकारों ने उठाए सवाल
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वाराणसी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश की राजनीति में जातिगत मुद्दे और सामाजिक शब्दावली को लेकर विवाद तेज होते जा रहे हैं। इसी बीच अब Banaras Hindu University के एक परीक्षा प्रश्न को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एमए इतिहास चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछे गए एक सवाल पर इतिहासकारों और सामाजिक चिंतकों के बीच बहस छिड़ गई है।

दरअसल, ‘आधुनिक भारतीय समाज में महिलाएं’ विषय के प्रश्न पत्र में छात्रों से पूछा गया—“ब्राह्मणवादी पितृसत्ता शब्द से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस प्रकार ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली।”

इस प्रश्न के सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया और अकादमिक जगत में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई इतिहासकारों ने इस शब्दावली के प्रयोग पर सवाल उठाए हैं, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे पाठ्यक्रम के दायरे में पूछा गया सामान्य अकादमिक प्रश्न बताया है।

इतिहासकारों ने जताई आपत्ति

University of Allahabad के इतिहास विभाग के प्रोफेसर हेरंब चतुर्वेदी ने इस प्रश्न पर आपत्ति जताते हुए कहा कि “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” एक अकादमिक शब्द हो सकता है, लेकिन वर्तमान समय में इसका इस्तेमाल विवाद को जन्म दे सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शब्दों को प्राचीन भारतीय इतिहास पर थोपना उचित नहीं है।

इतिहासकार योगेंद्र सिंह ने कहा कि “ब्राह्मणवाद” शब्द को मध्यकालीन कवियों और सामाजिक आंदोलनों ने काफी हद तक चुनौती दी थी। ऐसे में आज इस शब्दावली का प्रयोग संवेदनशील सामाजिक बहस को जन्म देता है।

इतिहास की प्राध्यापक अनुराधा सिंह ने भी कहा कि शब्द समय, समाज और परिस्थितियों के अनुसार बदलते हैं। उनके मुताबिक, “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” जैसे शब्दों का आज के दौर में प्रयोग सामाजिक भेदभाव और वैचारिक टकराव को बढ़ावा दे सकता है।

वहीं इतिहास के प्रोफेसर प्रवेश भारद्वाज ने कहा कि समय के साथ सामाजिक संरचनाएं और शब्दावली दोनों बदलती हैं। किसी एक वर्ग को संतुष्ट करने के प्रयास में दूसरे वर्ग की भावनाओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

चुनावी माहौल में बढ़ी संवेदनशीलता

प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए जातिगत और सामाजिक मुद्दे पहले से ही राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। समाजवादी पार्टी द्वारा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले पर जोर दिए जाने के बीच हाल ही में पार्टी प्रवक्ता राजकुमार भाटी के एक विवादित बयान पर भी बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।

ऐसे माहौल में बीएचयू के प्रश्न पत्र का यह मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से और अधिक संवेदनशील माना जा रहा है।

बीएचयू प्रशासन ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद Banaras Hindu University प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि परीक्षा में पूछा गया प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम के अंतर्गत था और इसे पूरी तरह अकादमिक दृष्टिकोण से शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय ने कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक विवाद का रूप देना उचित नहीं है।