Movie prime

अनंत चतुर्दशी से शुरु हुई रामनगर की रामलीला, रावण जन्म और रामावतार की भविष्यवाणी के साथ दुनिया के अनूठे रंगमंच से उठा पर्दा

 
..
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

वाराणसी। अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर वाराणसी के रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का भव्य शुभारंभ हो गया। करीब एक महीने तक चलने वाली इस ऐतिहासिक रामलीला के पहले दिन रामबाग लीला स्थल पर शाम करीब पांच बजे रावण जन्म और रामावतार की भविष्यवाणी के प्रसंग के साथ लीला का मंचन शुरू हुआ। इसके साथ ही दुनिया के अनूठे और पारंपरिक रंगमंच का पर्दा उठ गया।

 रामनगर की रामलीला में पहले दिन दोहों के साथ मंचन की शुरुआत हुई। सबसे पहले रावण के जन्म का प्रसंग दिखाया गया। जन्म के बाद रावण ने ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान मांगा कि वानर और मनुष्य को छोड़कर कोई उसका वध न कर सके। वरदान मिलते ही उसका अत्याचार बढ़ने लगा। उसने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया और कुबेर पर आक्रमण कर उनका पुष्पक विमान भी छीन लिया। रावण के आतंक से भयभीत देवराज इंद्र सहित अन्य देवता बैकुंठ की ओर चले गए।

 इसके बाद कुंभकरण और विभीषण के वरदान मांगने का प्रसंग हुआ। कुंभकरण भगवान ब्रह्मा से वरदान मांगने पहुंचा तो इंद्र को आशंका हुई कि कहीं वह इंद्रासन न मांग ले। ऐसे में इंद्र के प्रभाव से उसकी बुद्धि भ्रमित हो गई और उसने इंद्रासन के बजाय निद्रासन का वरदान मांग लिया। वहीं विभीषण ने भगवान के चरणों में अनुराग और भक्ति का वरदान मांगा।

 लीला में मेघनाद का प्रसंग भी बेहद प्रभावशाली रहा। मेघनाद ने इंद्र को बंदी बना लिया, जिसके बाद उसे ‘इंद्रजीत’ की उपाधि मिली। एक अन्य दृश्य में ब्रह्मा जी लंकिनी को बताते हैं कि राक्षसराज रावण लंबे समय तक लंका पर शासन करेगा, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब एक वानर का अपमान लंका के विनाश का कारण बनेगा और वह पूरी लंका को जला देगा।

 रावण के आतंक से देवताओं ने मांगी मुक्ति

 रावण के बढ़ते अत्याचार से धरती पर हाहाकार मच गया। पृथ्वी गाय का रूप धारण कर ब्रह्मा जी के पास पहुंची और रावण के आतंक से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। इसके बाद सभी देवता क्षीर सागर पहुंचे और भगवान विष्णु से रक्षा की गुहार लगाई।

 इसी दौरान आकाशवाणी हुई कि देवताओं को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। भगवान विष्णु ने मनुष्य रूप में धरती पर अवतार लेने का आश्वासन दिया। बताया गया कि मनु और शतरूपा ने अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के रूप में जन्म लिया है और भगवान उन्हीं के यहां राम के रूप में अवतार लेंगे।

 इसके साथ ही क्षीर सागर की भव्य झांकी सजाई गई। झांकी की आरती के दौरान रामलीला प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रामबाग पोखरे के चारों ओर दूर-दूर तक श्रद्धालु और लीला प्रेमी नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा में लोग हाथों में छड़ियां और छाते लिए तथा मानस की पोथी लेकर लीला का आनंद लेते दिखाई दिए। इसी के साथ पहले दिन की लीला का समापन हुआ।

 काशीराज को मिला गार्ड ऑफ ऑनर

 रामलीला की पहली शाम रामनगर किले के सामने लक्ष्मी-नारायण को भव्य बग्घी में विराजमान किया गया। काशीराज परिवार के सदस्य अनंत नारायण सिंह रामनगर किले से शाही सवारी के साथ निकले। रास्ते में हर-हर महादेव के जयघोष के बीच उनका स्वागत किया गया।

 शाही सवारी रामनगर चौक होते हुए रामबाग पहुंची। यहां 36वीं वाहिनी पीएसी के जवानों की टुकड़ी ने अनंत नारायण सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक आस्था से जुड़ी इस रामलीला के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक मौजूद रहे।