काशी विश्वनाथ मंदिर से सोना गायब होने के आरोपों का खंडन, मंडलायुक्त बोले—टूटा हिस्सा सुरक्षित, विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर होगी मरम्मत
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोपों पर मंदिर न्यास और मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिवक्ता नित्यानंद राय ने स्वर्ण प्लेटें गायब होने की आशंका जताते हुए जांच और मंदिर में लगे सोने-चांदी का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की थी। इसके बाद मंदिर न्यास ने खबरों को निराधार और भ्रामक बताया है। मंडलायुक्त ने भी कहा कि गुंबद अथवा कलश से सोना गायब होने की बात पूरी तरह गलत है और क्षतिग्रस्त हिस्सा मंदिर प्रशासन के पास सुरक्षित है।
नित्यानंद राय ने अपनी शिकायत में मंदिर के उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण पर लगभग दो फीट बाई तीन फीट क्षेत्र में स्वर्ण प्लेटें दिखाई नहीं देने का दावा किया था। उन्होंने अन्य स्थानों पर प्लेटें टूटी होने, उत्तर दिशा में छोटे गोलाकार हिस्से में सोना दिखाई नहीं देने और दक्षिण दिशा में एग्जॉस्ट फैन के ऊपर लगी स्वर्ण प्लेट उखड़ी होने का भी उल्लेख किया था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि 23 सितंबर को शिकायत देने के बाद भी स्वर्ण प्लेटें दिखाई नहीं देने वाले हिस्से का दायरा बढ़ रहा था। उन्होंने उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने तथा मंदिर और कॉरिडोर में लगे सोने-चांदी का विस्तृत विवरण श्वेत पत्र के माध्यम से सार्वजनिक करने की मांग की। इसके अलावा, वर्ष 2022 में दान किए गए सोने से लगाई गई प्लेटों की गुणवत्ता जांचने और पुराने फोटो व सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई।
राय ने प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा शिकायत का संज्ञान लिए जाने का दावा भी किया था। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेजों में संबंधित पत्र नहीं होने के कारण इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इन आरोपों पर मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने अपनी बाइट में बताया कि करीब तीन महीने पहले ओलावृष्टि के दौरान मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर लगे गुंबद अथवा कलश का एक हिस्सा गिर गया था। मंदिर प्रशासन ने उस हिस्से को सुरक्षित रख लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित सोना गायब होने की खबर को भ्रामक बताया।
मंडलायुक्त के अनुसार, मंदिर की संरचनात्मक मजबूती का आकलन करने की जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास को दी गई है और इसके लिए भुगतान भी किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के इसी महीने के अंत तक दौरे का कार्यक्रम था। उनकी रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक मरम्मत कराई जाएगी।
वहीं, 14 अक्टूबर को जारी लिखित स्पष्टीकरण में मंदिर न्यास ने बताया कि मुख्य मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य कोण पर स्थापित शिखर अप्रैल 2026 में क्षतिग्रस्त हुआ था। उसे यथास्थिति मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा गया है। न्यास ने सोना गायब होने संबंधी खबरों का खंडन किया है।
न्यास के मुताबिक, आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीम धाम का स्थलीय निरीक्षण कर जुलाई 2026 में प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर चुकी है। रिपोर्ट में प्राकृतिक पत्थर और लकड़ी पर पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले क्षरण का उल्लेख करते हुए संरक्षण कार्य से पहले सामग्री के सूक्ष्म विश्लेषण और आवश्यक तकनीकी जांच की जरूरत बताई गई है।
लिखित स्पष्टीकरण में विशेषज्ञ टीम का अगला निरीक्षण नवंबर 2026 में प्रस्तावित बताया गया है। निरीक्षण और परीक्षणों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी, जिसमें मंदिर की संरचनात्मक सुरक्षा तथा धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक महत्ता के संरक्षण के उपाय सुझाए जाएंगे।
क्षति के समय और विशेषज्ञों के अगले दौरे को लेकर मंडलायुक्त की बाइट तथा न्यास के लिखित बयान में अलग-अलग समय का उल्लेख है। मंडलायुक्त ने घटना करीब तीन महीने पहले की और दौरे का कार्यक्रम इसी महीने के अंत तक बताया, जबकि न्यास ने क्षति अप्रैल में होने और अगला निरीक्षण नवंबर में प्रस्तावित होने की जानकारी दी है। दोनों पक्षों ने क्षतिग्रस्त हिस्सा सुरक्षित होने की बात कही है।
मंदिर न्यास ने कहा कि संरक्षण और मरम्मत का काम विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह तथा वैज्ञानिक पद्धति के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों से सोने की चोरी की पुष्टि नहीं होती।
