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2,000 की साइबर ठगी की जांच में खुला 20 करोड़ के बेटिंग नेटवर्क का राज, दो आरोपी गिरफ्तार
 

 
 2,000 की साइबर ठगी की जांच में खुला 20 करोड़ के बेटिंग नेटवर्क का राज, दो आरोपी गिरफ्तार
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वाराणसी। महज दो हजार रुपये की साइबर ठगी की शिकायत की जांच करते हुए साइबर क्राइम थाना पुलिस ने करोड़ों रुपये के अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कानपुर नगर निवासी दीपक सिंह और प्रवीण सिंह को जगतगंज क्षेत्र के दासनगर कॉलोनी से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपितों द्वारा संचालित बेटिंग ऐप के जरिए करीब 20 करोड़ रुपये के लेनदेन किए गए थे।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से नौ मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। साथ ही जांच के दौरान पांच लाख रुपये की धनराशि होल्ड कराई गई है। पूछताछ में गिरोह से जुड़े दिलावर और प्रवीण उर्फ अक्षय नामक दो अन्य आरोपितों का भी पता चला है, जिनकी तलाश की जा रही है।

एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल पर एक महिला ने दो हजार रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि उसका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर क्यूआर कोड के माध्यम से रुपये ट्रांसफर करा लिए गए थे। जांच के दौरान एक मोबाइल नंबर सामने आया, जिसकी पड़ताल करने पर पता चला कि ठगी की रकम ‘ओम वेबसाइट बुक’ नामक बेटिंग ऐप के जरिए खपाई जा रही थी।

पुलिस ने बताया कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देकर लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देता था। टेलीग्राम और व्हाट्सएप समूहों में वर्चुअल नंबरों के जरिए लोगों को जोड़कर प्रतिदिन लगभग पांच लाख रुपये का लेनदेन किया जाता था। ठगी की रकम को म्यूल बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और थर्ड पार्टी एप्लीकेशन के माध्यम से निकाल लिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि धन जमा कराने के लिए विभिन्न बैंक खातों और मर्चेंट क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि जीत-हार के भुगतान के लिए अलग-अलग पोर्टल और बैंक खातों का सहारा लिया जाता था। आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड और अन्य व्यक्तियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों का उपयोग करते थे।

बरामद मोबाइल फोन की जांच में बेटिंग पैनल, यूजर आईडी, बैंकिंग विवरण, भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट समेत कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका, अवैध कमाई के स्रोत और पूरे आर्थिक तंत्र की गहन जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पिछले तीन वर्षों से वाराणसी में सक्रिय था और इसके तार चार राज्यों तक जुड़े हुए हैं। आरोपितों ने सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया है।

गौरतलब है कि बीते 23 दिनों में साइबर पुलिस का यह दूसरा बड़ा खुलासा है। इससे पहले एक जून को पुलिस ने आईपीएल सट्टेबाजी में निवेश का झांसा देकर करीब दो लाख लोगों से 700 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था, जिसमें 13 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था।

वाराणसी। महज दो हजार रुपये की साइबर ठगी की शिकायत की जांच करते हुए साइबर क्राइम थाना पुलिस ने करोड़ों रुपये के अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कानपुर नगर निवासी दीपक सिंह और प्रवीण सिंह को जगतगंज क्षेत्र के दासनगर कॉलोनी से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपितों द्वारा संचालित बेटिंग ऐप के जरिए करीब 20 करोड़ रुपये के लेनदेन किए गए थे।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से नौ मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। साथ ही जांच के दौरान पांच लाख रुपये की धनराशि होल्ड कराई गई है। पूछताछ में गिरोह से जुड़े दिलावर और प्रवीण उर्फ अक्षय नामक दो अन्य आरोपितों का भी पता चला है, जिनकी तलाश की जा रही है।

एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल पर एक महिला ने दो हजार रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि उसका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर क्यूआर कोड के माध्यम से रुपये ट्रांसफर करा लिए गए थे। जांच के दौरान एक मोबाइल नंबर सामने आया, जिसकी पड़ताल करने पर पता चला कि ठगी की रकम ‘ओम वेबसाइट बुक’ नामक बेटिंग ऐप के जरिए खपाई जा रही थी।

पुलिस ने बताया कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देकर लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देता था। टेलीग्राम और व्हाट्सएप समूहों में वर्चुअल नंबरों के जरिए लोगों को जोड़कर प्रतिदिन लगभग पांच लाख रुपये का लेनदेन किया जाता था। ठगी की रकम को म्यूल बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और थर्ड पार्टी एप्लीकेशन के माध्यम से निकाल लिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि धन जमा कराने के लिए विभिन्न बैंक खातों और मर्चेंट क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि जीत-हार के भुगतान के लिए अलग-अलग पोर्टल और बैंक खातों का सहारा लिया जाता था। आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड और अन्य व्यक्तियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों का उपयोग करते थे।

बरामद मोबाइल फोन की जांच में बेटिंग पैनल, यूजर आईडी, बैंकिंग विवरण, भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट समेत कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका, अवैध कमाई के स्रोत और पूरे आर्थिक तंत्र की गहन जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पिछले तीन वर्षों से वाराणसी में सक्रिय था और इसके तार चार राज्यों तक जुड़े हुए हैं। आरोपितों ने सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया है।

गौरतलब है कि बीते 23 दिनों में साइबर पुलिस का यह दूसरा बड़ा खुलासा है। इससे पहले एक जून को पुलिस ने आईपीएल सट्टेबाजी में निवेश का झांसा देकर करीब दो लाख लोगों से 700 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था, जिसमें 13 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था।