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काशी में सेना के शौर्य को नमन, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर वीर जवानों को समर्पित रही गंगा आरती

 
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वाराणसी। दशाश्वमेध घाट पर गुरुवार शाम देशभक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को समर्पित विशेष मां गंगा आरती का आयोजन किया गया। यह आयोजन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर किया गया, जिसमें सेना के साहस और बलिदान को नमन किया गया।

गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में इस बार देशभक्ति का विशेष रंग देखने को मिला। घाट पर दीपों की रोशनी, शंखनाद और डमरू की गूंज के बीच पूरा वातावरण “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंज उठा। आरती देखने पहुंचे श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने भी भारतीय सेना के सम्मान में तालियां बजाकर जवानों का अभिवादन किया।

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आरती शुरू होने से पहले गंगा सेवा निधि के अर्चकों ने Pahalgam में हुए आतंकी हमले में जान गंवाने वाले पर्यटकों और गाइड की आत्मा की शांति के लिए मां गंगा में दीपदान किया। इस दौरान घाट पर मौजूद लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

गंगा सेवा निधि से जुड़े आशीष तिवारी ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना सहित सीमा सुरक्षा बल द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया एक बड़ा अभियान था। यह अभियान 7 से 10 मई 2025 के बीच पश्चिमी सीमा पर चलाया गया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था।

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उन्होंने बताया कि यह सैन्य कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। उस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय गाइड की मौत हो गई थी। इसी के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाकर जवाब दिया था।

काशी की इस विशेष गंगा आरती ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आध्यात्मिक नगरी वाराणसी केवल संस्कृति और आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और वीर जवानों के सम्मान की भी भूमि है।