गोमाता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की मांग, वाराणसी समेत देशभर 15 करोड़ हस्ताक्षरों के साथ सौंपे गए ज्ञापन
गो सम्मान आह्वान अभियान के दूसरे चरण में वाराणसी समेत देशभर के जिलों में 15 करोड़ से अधिक हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन सौंपा गया। अभियान के तहत गोहत्या पर केंद्रीय कानून, गोमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान और केंद्रीय गो मंत्रालय समेत 30 से अधिक मांगें सरकार के सामने रखी गई हैं।
वाराणसी: गोमाता की सुरक्षा, सेवा और सम्मान को लेकर चल रहे गो सम्मान आह्वान अभियान के दूसरे चरण में वाराणसी समेत देशभर के सभी जिलों में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। अभियान के तहत 15 करोड़ से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षरों वाला प्रार्थना-पत्र संबंधित जिलाधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया। वाराणसी में भी करीब 5.5 लाख लोगों के हस्ताक्षरों के साथ ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।
देशभर में छह महीने से चल रहा है अभियान
अभियान से जुड़े संतों और आयोजकों ने बताया कि पिछले लगभग छह महीने से देशभर में गो सम्मान आह्वान अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य गोमाता की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने प्रमुखता से रखना है।

अभियान के तहत देशभर में जनजागरण कार्यक्रम चलाए गए और लाखों लोगों से हस्ताक्षर कराकर समर्थन जुटाया गया। इसके बाद इन हस्ताक्षरों को प्रार्थना-पत्र के साथ सरकार तक पहुंचाया गया।
सरकार के सामने रखी गईं 30 से अधिक प्रमुख मांगें
अभियान के प्रतिनिधियों ने बताया कि ज्ञापन में 30 से अधिक प्रमुख मांगें शामिल हैं। इनमें पूरे देश में गोहत्या पर केंद्रीय कानून बनाने, गोमाता को 'राष्ट्रमाता' का सम्मान देने, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना, गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और केंद्रीय गो-चारा नीति लागू करने जैसी मांगें प्रमुख हैं।
इसके अलावा कृषि, पर्यावरण, चिकित्सा, शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी नीतियों में भी गो आधारित व्यवस्था को शामिल करने का आग्रह किया गया है।
पहले चरण में सौंपे गए थे 5 करोड़ हस्ताक्षर
अभियान के संयोजकों के अनुसार, पहले चरण में 27 अप्रैल 2026 को देश की करीब 5,000 तहसीलों के माध्यम से 5 करोड़ से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षर सरकार को सौंपे गए थे। उनका कहना है कि इन मांगों पर अब तक अपेक्षित निर्णय नहीं होने के कारण दूसरे चरण में फिर से देशभर के जिलों से 15 करोड़ से अधिक हस्ताक्षरों वाला अनुस्मारक ज्ञापन भेजा गया है।
पूजन, शंखनाद और प्रार्थना यात्रा के साथ हुआ कार्यक्रम
वाराणसी में कार्यक्रम की शुरुआत गोमाता के पूजन, शंखनाद और 'श्री राम जय राम जय जय राम' मंत्र के सामूहिक जाप से हुई। इसके बाद गोभक्तों ने झंडे, बैनर, अभियान से जुड़े संदेशों वाले पोस्टर और भजन-कीर्तन के साथ शांतिपूर्ण प्रार्थना यात्रा निकाली।
यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण-बलराम की झांकी, गोमाता की झांकी और हस्ताक्षर अभियान का प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किया गया। इसके बाद संतों, सामाजिक संगठनों और अभियान के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
'गोमाता आस्था ही नहीं, देश की अर्थव्यवस्था का भी आधार'
अभियान के प्रतिनिधियों ने कहा कि गोमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, खेती, पर्यावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनकल्याण से भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ज्ञापन में शामिल सभी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अभियान पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से चलाया जा रहा है और मांगें पूरी होने तक इसे चरणबद्ध रूप से आगे भी जारी रखा जाएगा।
कार्यक्रम में जिले के संत-महात्मा, विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, मातृशक्ति, युवा, किसान, व्यापारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में गोभक्त शामिल हुए। आयोजन के दौरान अनुशासन और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
