सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का समापन, बोले मंत्री सुरेश खन्ना- UP-MP विरासत से विकास के नए आयाम गढ़ रहे
Updated: Apr 5, 2026, 22:33 IST
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सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का समापन, बोले मंत्री सुरेश खन्ना- UP-MP विरासत से विकास के नए आयाम गढ़ रहे वाराणसी। काशी की पावन धरती पर आयोजित तीन दिवसीय महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत और सम्राट विक्रमादित्य के योगदान को याद करते हुए महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
विक्रमादित्य को बताया लोकमान्य नायक
मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के बाद यदि किसी लोकनायक का नाम आता है, तो वह उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य हैं। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य को पहला स्वतंत्रता सेनानी कहना गलत नहीं होगा, जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर भारतीय गौरव को स्थापित किया।
उन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत और सिंहासन बत्तीसी, विक्रम-बेताल जैसी कथाओं के जरिए उनके ज्ञान, न्याय और पराक्रम का उल्लेख किया।
यूपी–एमपी की सांस्कृतिक साझेदारी
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश मिलकर “विरासत से विकास” की नई कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने काशी में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का जिक्र करते हुए इसे दोनों राज्यों के सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक बताया।
लोक कलाकारों ने बांधा समा
महानाट्य से पहले मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने मंच पर शानदार प्रस्तुतियां दीं। मालवा की मटकी, निमाड़ का गणगौर, डिंडोरी का गुदम्बबाजा, सागर का बरेदी और उज्जैन का डमरू जैसे लोक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक कला यात्रा के माध्यम से भी शहरवासियों को मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराया गया।
प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान बीएलडब्ल्यू मैदान में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें आर्ष भारत, शिव पुराण, चौरासी महादेव, श्री हनुमान और मध्य प्रदेश के पवित्र स्थलों को दर्शाया गया।
प्रदर्शनी में शामिल कई लोगों ने पहली बार जाना कि अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण से सम्राट विक्रमादित्य का भी संबंध बताया जाता है।
छात्रा रोहिणी यादव ने इसे ज्ञानवर्धक बताया, वहीं अन्य दर्शकों ने इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक पहल कहा।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने उत्तर प्रदेश सरकार, वाराणसी जिला प्रशासन और सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक संजय यादव ने आयोजन की सफलता के लिए सभी विभागों और अधिकारियों के सहयोग को सराहा
विक्रमादित्य को बताया लोकमान्य नायक
मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के बाद यदि किसी लोकनायक का नाम आता है, तो वह उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य हैं। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य को पहला स्वतंत्रता सेनानी कहना गलत नहीं होगा, जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर भारतीय गौरव को स्थापित किया।
उन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत और सिंहासन बत्तीसी, विक्रम-बेताल जैसी कथाओं के जरिए उनके ज्ञान, न्याय और पराक्रम का उल्लेख किया।
यूपी–एमपी की सांस्कृतिक साझेदारी
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश मिलकर “विरासत से विकास” की नई कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने काशी में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का जिक्र करते हुए इसे दोनों राज्यों के सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक बताया।
लोक कलाकारों ने बांधा समा
महानाट्य से पहले मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने मंच पर शानदार प्रस्तुतियां दीं। मालवा की मटकी, निमाड़ का गणगौर, डिंडोरी का गुदम्बबाजा, सागर का बरेदी और उज्जैन का डमरू जैसे लोक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक कला यात्रा के माध्यम से भी शहरवासियों को मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराया गया।
प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान बीएलडब्ल्यू मैदान में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें आर्ष भारत, शिव पुराण, चौरासी महादेव, श्री हनुमान और मध्य प्रदेश के पवित्र स्थलों को दर्शाया गया।
प्रदर्शनी में शामिल कई लोगों ने पहली बार जाना कि अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण से सम्राट विक्रमादित्य का भी संबंध बताया जाता है।
छात्रा रोहिणी यादव ने इसे ज्ञानवर्धक बताया, वहीं अन्य दर्शकों ने इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक पहल कहा।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने उत्तर प्रदेश सरकार, वाराणसी जिला प्रशासन और सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक संजय यादव ने आयोजन की सफलता के लिए सभी विभागों और अधिकारियों के सहयोग को सराहा
