संस्कृति संसद: काशी में देशभर से जुटेंगे 3,000 साधु-संत, सनातन परंपरा, मनुस्मृति और मंदिर मुक्ति पर होगी चर्चा
वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में तीन से पांच नवंबर तक छठवीं संस्कृति संसद का आयोजन किया जाएगा। सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 3,000 साधु-संत, धर्माचार्य, विद्वान, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, युवा और कलाकार शामिल होंगे। आयोजन में बलूचिस्तान के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इस दौरान सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति, सामाजिक बदलाव और बलूचिस्तान की आजादी जैसे विषयों पर चर्चा के साथ आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
गंगा महासभा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री काशी विद्वत परिषद का मार्गदर्शन प्राप्त है। मुख्य आयोजन से पहले 31 अक्टूबर से दो नवंबर तक विभिन्न प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी। वहीं, दो नवंबर को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में महारुद्राभिषेक का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
हिंदू आचार संहिता होगी सार्वजनिक
संस्कृति संसद में हिंदू आचार संहिता को सार्वजनिक करने की योजना है। इसके साथ ही मनुस्मृति के अध्ययन के लिए समिति गठित करने और मंदिर मुक्ति के लिए रूपरेखा तैयार करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। चार नवंबर को संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, श्री काशी विद्वत परिषद और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है। इसमें मौजूदा परिस्थितियों और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर
संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के अनुसार, इस बार संस्कृति संसद में युवाओं की भागीदारी को खास महत्व दिया जाएगा। जेन-जी के लिए विशेष युवा संवाद आयोजित होगा। सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक विभिन्न विषयों पर चर्चा, पैनल विमर्श और प्रश्नोत्तर सत्र होंगे। शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक संस्कृति उत्सव में युवा कलाकार और सांस्कृतिक समूह अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता और बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इनके माध्यम से भारतीय संस्कृति के आध्यात्मिक, बौद्धिक, सामाजिक और कलात्मक पक्षों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना
आयोजन में रॉ के पूर्व निदेशक एनके सूद, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा सांसद काकोली घोष, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल, पत्रकार अशोक श्रीवास्तव और अमन चोपड़ा, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी मिलिंद परांडे और आलोक कुमार तथा अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन समेत कई अन्य नाम भी प्रस्तावित सूची में शामिल हैं।
महंत रवींद्र पुरी, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी रामदेव, चिदानंद सरस्वती और अन्य संत एवं धर्माचार्य भी विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखेंगे।
संस्कृति संसद का उद्देश्य सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और समकालीन सामाजिक मुद्दों पर संवाद को आगे बढ़ाना है। तीन से पांच नवंबर तक होने वाले इस आयोजन में धार्मिक विमर्श के साथ युवाओं, विशेषज्ञों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।
