वाराणसी DRM कार्यालय के वरिष्ठ DMM 1.27 लाख की रिश्वत लेते CBI के हत्थे चढ़े, गिरफ्तार
वाराणसी। पूर्वोत्तर रेलवे के बनारस रेल मंडल मुख्यालय (डीआरएम कार्यालय) में तैनात वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक नितिश अग्रवाल को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की लखनऊ एंटी करप्शन टीम ने 1.27 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई रेलवे में माल की आपूर्ति करने वाले एक ठेकेदार संदीप की शिकायत पर की गई।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की टीम सबसे पहले नितिश अग्रवाल के सरकारी आवास पर पहुंची, जहां उन्हें रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया गया। इसके बाद टीम उन्हें अपने साथ लखनऊ ले गई। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार अधिकारी को आज सीबीआई की विशेष अदालत (कोर्ट संख्या-5) में पेश किया जाएगा।
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई अधिकारियों ने नितिश अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ की। इस दौरान रेलवे में खरीद प्रक्रिया, ठेकों और सामग्री आपूर्ति से जुड़े मामलों में विस्तृत जानकारी जुटाई गई। वहीं, उनके आवास पर परिजनों से भी पूछताछ की गई।
सीबीआई की टीम डीआरएम कार्यालय भी पहुंची थी, लेकिन कार्यालय बंद होने के कारण वहां विस्तृत कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि, जांच एजेंसी पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भी पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।
रेलवे में भ्रष्टाचार के मामलों की लंबी श्रृंखला
बनारस रेल मंडल में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में सीबीआई ने इंजीनियरिंग विभाग में तैनात तत्कालीन वरिष्ठ मंडल अभियंता सत्यम कुमार सिंह को 2 लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था। उस समय महेंद्र सिंह नामक ठेकेदार की शिकायत पर सीबीआई ने लंच के दौरान उनके चैंबर में छापा मारकर कार्रवाई की थी।
इसके अलावा 16 जुलाई 2026 को गति शक्ति योजना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में बनारस रेल मंडल के सीनियर डीईएन (कोऑर्डिनेशन) राकेश रंजन, एसएसई अभिषेक गुप्ता सहित तीन अन्य रेल कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत छह धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। उस दौरान सीबीआई ने राकेश रंजन को उनके सरकारी आवास पर घंटों नजरबंद रखकर पूछताछ की थी और डीआरएम कार्यालय में भी कई कर्मचारियों से पूछताछ की गई थी।
इसी वर्ष उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में भी सीबीआई की छापेमारी हुई थी, जिसमें वाराणसी जंक्शन पर स्थापित ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतों की जांच की गई थी।
लगातार हो रही सीबीआई की कार्रवाइयों और गिरफ्तारियों के बावजूद रेलवे में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों का सामने आना गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। अब इस ताजा कार्रवाई के बाद बनारस रेल मंडल की खरीद प्रक्रिया और ठेकों की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
