शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सीएम योगी पर हमला, बोले- ये मठाधीश महाराज हठ पर उतारू...
वाराणसी। ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को वाराणसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दोनों डिप्टी सीएम भाजपा को हो रहे नुकसान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन “मठाधीश महाराज हठ पर उतारू हैं।”
उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा ‘कालनेमि’ शब्द के प्रयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। “कालनेमि कौन है? यह बताया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, असली हिंदू कौन है और कौन छल, वेशधारी व ढोंगी आचरण वाला है यह स्पष्ट होना चाहिए।
संत समाज को 10 दिन का समय
शंकराचार्य ने संत समाज को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि वे स्पष्ट करें कि वे किसके साथ हैं। “शास्त्र और सनातन को छोड़कर किसी के पक्ष में नहीं रहा जा सकता। यदि कोई मुख्यमंत्री के पक्ष में खड़ा होता है तो उसके साथ भी वही व्यवहार होगा,” उन्होंने चेतावनी दी।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गेरुआ वस्त्र पहनने वाला व्यक्ति मांसाहारी हो सकता है? क्या कोई विरक्त संत वेतनभोगी हो सकता है? “10 दिन में जवाब दीजिए, अन्यथा हम मानेंगे कि आप मुख्यमंत्री का समर्थन कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।
डिप्टी सीएम पर भी निशाना
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों की पूजा किए जाने पर उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत भावना का प्रदर्शन है। “अगर यह राजनीति नहीं थी, तो जिस बटुक की चोटी खींची गई थी, उसे बुलाकर पूजन करते?” उन्होंने सवाल किया।
वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर‘बटुकों को पीटने पर महापाप लगेगा’पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि इससे प्रतीत होता है कि उनके पास कार्रवाई की शक्ति नहीं है।
11 मार्च को लखनऊ में जुटेगा संत समाज
शंकराचार्य ने घोषणा की कि 11 मार्च को लखनऊ में संत, महंत और विद्वान एकत्र होकर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि गो-रक्षा के नाम पर ठोस कदम नहीं उठाए गए। “फिल्म ‘गोदान’ को टैक्स फ्री करने या डीएम को गोशालाएं सुधारने का संदेश भेजने से समस्या का समाधान नहीं होगा,” उन्होंने कहा।
मौनी अमावस्या विवाद का जिक्र
उन्होंने प्रयागराज माघ मेले की मौनी अमावस्या (18 जनवरी) की घटना का भी जिक्र किया। उस दिन माघ मेला के दौरान उनकी पालकी को पुलिस ने संगम जाने से रोक दिया था और पैदल जाने को कहा था। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया और पालकी को दूर ले जाया गया। शंकराचार्य स्नान नहीं कर सके और बाद में धरने पर बैठ गए थे।
उस समय डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज में बयान दिया था कि यदि किसी संत का अपमान हुआ है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, वे शंकराचार्य से मिलने नहीं पहुंचे थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने दोहराया कि संत समाज को अब स्पष्ट रुख अपनाना होगा और शास्त्रसम्मत आचरण पर चलना होगा।
