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काशी में कुत्तों के लिए बना ‘श्री काल भैरव डॉग अनाथालय’: ICU से लेकर एंबुलेंस तक सभी सुविधाएं, आरती उतारकर किया जाता है स्वागत

 
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वाराणसी। काशी में कुत्तों के लिए बना ‘श्री काल भैरव डॉग अनाथालय’: ICU से लेकर एंबुलेंस तक सभी सुविधाएं, आरती उतारकर किया जाता है स्वागत वाराणसी। जहां एक ओर धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी अपनी अनूठी परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। वहीं दूसरी ओर यहां मानवता का भी एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है, जहां बेसहारा, घायल और जरूरतमंद कुत्तों को नया जीवन और आश्रय स्थल दिया जा रहा है। जिन्हें दुनिया ने ठुकरा दिया उसे इस अनाथालय ने अपनाया है।

यहां स्थित है डॉग अनाथालय’

हम बात कर रहे हैं वाराणसी के हरहुआ क्षेत्र में स्थित ‘श्री काल भैरव डॉग अनाथालय’ की। महादेव की नगरी काशी में कुत्तों को काल भैरव की सवारी माना जाता है, इसलिए इस अनोखे अनाथालय का नाम भी इसी आस्था से प्रेरित है। यहां सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए या मालिकों द्वारा छोड़ दिए गए कुत्तों को सुरक्षित आश्रय, उपचार और संपूर्ण देखभाल प्रदान की जाती है। आधुनिक सुविधआओं से लेस है ये डॉग अनाथालय’ करीब एक बीघा क्षेत्र में फैले इस अनाथालय में फिलहाल लगभग 200 देसी और पालतू कुत्ते संरक्षण में हैं।

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अनाथालय में कुत्तों की देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाओं की पूरी व्यवस्था है छोटा आईसीयू, डॉग एंबुलेंस, रेस्क्यू टीम, लगभग 10 सदस्यों का स्टाफ, जिसमें डॉक्टर और केयरटेकर शामिल है। ये टीमें दिन-रात घायल और बीमार कुत्तों के उपचार व देखभाल में जुटी रहती हैं।

रेस्क्यू होकर आने वाले कुत्तों की उतारते है आरती

अनाथालय की संस्थापक सुदेशना बासु ने बताया कि यह स्थान सिर्फ आश्रय नहीं, बल्कि “जीवन देने का प्रयास” है। इस अनाथालय की सबसे अनोखी विशेषता इसकी आध्यात्मिक परंपरा है। जब भी कोई नया कुत्ता यहां रेस्क्यू होकर आता है उसकी आरती उतारी जाती है, चंदन लगाया जाता है और उसके स्वभाव के अनुसार नाम रखा जाता है।

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अनाथालय के सीईओ दिलीप सेन गुप्ता ने बताया कि उनका उद्देश्य है कि कोई भी कुत्ता सड़कों पर घायल या भूखा न भटके। उन्होंने बताया कि यहां नियमित रूप से कुत्तों के भोजन, दवाइयां और अन्य सभी जरूरतें समय से पूरी की जाती हैं।

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