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गाजीपुर की बेटी श्रीनी श्रीवास्तव ने रचा इतिहास, वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने वाली बनीं पहली महिला लोको पायलट

 
गाजीपुर
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Varanasi News: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की बेटी श्रीनी श्रीवास्तव ने भारतीय रेलवे में अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर एक खास पहचान बनाई है। वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन में महिला सहायक लोको पायलट के रूप में जिम्मेदारी निभाकर उन्होंने एक नई उपलब्धि हासिल की है। खास बात यह है कि श्रीनी अब चेयरकार वंदे भारत के साथ वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के संचालन दल का भी हिस्सा हैं। उनका अगला सपना बुलेट ट्रेन चलाने का है।

दैनिक जागरण से बातचीत में श्रीनी श्रीवास्तव ने अपने रेलवे के सफर, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया। गाजीपुर के सरैया छावनी की रहने वाली श्रीनी की इस उपलब्धि से उनके परिवार के साथ पूर्वांचल में भी खुशी का माहौल है।

2017 में रेलवे में मिली पहली नौकरी, गोरखपुर से शुरू हुआ सफर

श्रीनी श्रीवास्तव के पिता पंकज श्रीवास्तव लोक निर्माण विभाग (PWD) में अमीन के पद पर कार्यरत थे। वह अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी मां माया श्रीवास्तव और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उनके करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्रीनी ने सुल्तानपुर स्थित राजकीय महिला पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने रेलवे में नौकरी के लिए प्रयास शुरू किया। कई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 10 अप्रैल 2017 को पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर में सहायक लोको पायलट (ALP) के पद पर उनका चयन हो गया।

रेलवे में नौकरी मिलने के बाद उन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता और कार्यक्षमता के दम पर आगे बढ़ना जारी रखा।

गोरखपुर से वाराणसी पहुंचीं, वंदे भारत चलाने की मिली ट्रेनिंग

श्रीनी श्रीवास्तव की कार्यकुशलता और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए उन्हें वाराणसी में स्थानांतरण मिला। यहां उन्हें वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग लेने का अवसर मिला।

उन्होंने गोरखपुर स्थित बहुविषयक पद्धति प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद वर्ष 2023 में शुरू हुई 22415 चेयरकार वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन की जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला।

इस उपलब्धि के बाद श्रीनी की पहचान रेलवे के साथ-साथ देशभर में होने लगी। वर्ष 2024 में उनके काम को विशेष पहचान मिली, जब उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया।

वंदे भारत स्लीपर के संचालन दल में भी मिली जगह

श्रीनी श्रीवास्तव की उपलब्धियों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी से नई दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस की शुरुआत के साथ उन्हें इसके संचालन दल में भी शामिल किया गया।

इस ट्रेन के उद्घाटन के अवसर पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। श्रीनी इस ट्रेन में सहायक लोको पायलट की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

वंदे भारत स्लीपर जैसी आधुनिक ट्रेन के संचालन दल में उनकी भागीदारी रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।

अब बुलेट ट्रेन चलाना है श्रीनी का अगला सपना

श्रीनी श्रीवास्तव का कहना है कि वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने का अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा है। अब उनकी इच्छा देश में शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन की ड्राइविंग सीट तक पहुंचने की है।

उनके मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर के उद्घाटन के दौरान रेल मंत्री ने बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर जानकारी दी थी। तभी से उनके मन में बुलेट ट्रेन चलाने का सपना और मजबूत हो गया।

अगर उन्हें यह अवसर मिलता है तो वह इसे अपने लिए बड़े सौभाग्य की बात मानेंगी।

26 सेकेंड में 100 किलोमीटर की रफ्तार, हर पल रहना पड़ता है सतर्क

श्रीनी के मुताबिक, सहायक लोको पायलट की नौकरी केवल ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं है। इसमें यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। ट्रेन के संचालन के दौरान हॉर्न, मीटर, सिग्नल और गति पर लगातार नजर रखनी पड़ती है।

उन्होंने बताया कि वंदे भारत एक्सप्रेस महज 26 सेकेंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है। ऐसे में लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को हर समय सतर्क और एकाग्र रहना पड़ता है।

बेटियों से की रेलवे में करियर बनाने की अपील

श्रीनी श्रीवास्तव का मानना है कि अगर बेटियों में कुछ करने का जज्बा और मेहनत करने की इच्छाशक्ति है तो रेलवे में उनके लिए भी बेहतर अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि सहायक लोको पायलट बनना उनके लिए गर्व की बात है, क्योंकि इस पद पर रहते हुए यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभानी होती है।

रेलवे में अपने नौ साल के अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अधिकारियों का सहयोग और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयास कामकाजी माहौल को बेहतर बनाते हैं। रात की ड्यूटी के दौरान भी महिला कर्मचारियों की जरूरतों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

गाजीपुर से निकलकर भारतीय रेलवे में अपनी अलग पहचान बनाने वाली श्रीनी श्रीवास्तव की कहानी उन युवतियों के लिए प्रेरणा है, जो तकनीकी और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपना करियर बनाना चाहती हैं।