मनीष सिंह हत्याकांड पर सपा प्रतिनिधिमंडल और पुलिस में टकराव, गांव जाने से रोके जाने पर सड़क पर धरना
वाराणसी I वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र में दोना-पत्तल व्यापारी मनीष सिंह की हत्या के मामले ने सोमवार को राजनीतिक तूल पकड़ लिया। घटना की जानकारी लेने पहुंचे समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस द्वारा प्रतिनिधिमंडल को गांव जाने से रोके जाने पर सपा नेता सड़क पर धरने पर बैठ गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार, भरथरा घमहापुर गांव से करीब 4 किलोमीटर पहले बसनी दर्जीपुर क्षेत्र में पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर सपा नेताओं को रोक दिया। इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
प्रतिनिधिमंडल में सपा जिलाध्यक्ष सुजीत यादव लक्कड़, पूर्व पार्षद व मेयर प्रत्याशी ओपी सिंह, चंदौली सांसद के प्रतिनिधि नवीन सिंह बबलू सहित कई नेता शामिल थे। सपा नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को दमनकारी बताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन हत्याकांड की गंभीरता को छिपाने की कोशिश कर रहा है।
करीब आधे घंटे तक चले धरना और बातचीत के बाद स्थिति तब सामान्य हुई जब एडीसीपी गोमती जोन नृपेंद्र सिंह और एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना मौके पर पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल को आगे जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद सपा नेता पैदल ही मनीष सिंह के गांव पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की।
गौरतलब है कि रविवार रात एक मामूली विवाद के बाद मनीष सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें बुरी तरह पीटा और गंभीर चोटों के चलते उनकी मौत हो गई। मृतक के चाचा की तहरीर पर आठ नामजद और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
परिजनों ने सपा प्रतिनिधिमंडल के सामने आरोपियों के एनकाउंटर, घर पर बुलडोजर कार्रवाई, मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी और दो करोड़ रुपये मुआवजे की मांग रखी। इस दौरान यह भी सामने आया कि जिन लोगों को मनीष सिंह ने पहले रोजगार दिया था, उन्हीं में से कुछ लोग इस घटना में शामिल बताए जा रहे हैं।
सपा प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। वहीं घटना के बाद से गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
