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UGC नियम पर Supreme Court की रोक, फिर भी वाराणसी में छात्रों का विरोध, बोले- पूरी तरह वापस लें कानून

 
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वाराणसी। सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस नियम पर रोक लगाने के आदेश के बाद भी वाराणसी में विरोध की आवाज थमती नजर नहीं आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा को ज्ञापन सौंपा।

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छात्रों ने मांग की कि इस नियम को पूरी तरह रद्द किया जाए और उनकी आपत्तियों को सरकार तक पहुंचाया जाए। छात्रों का कहना है कि यह नियम उच्च शिक्षा और छात्रों के हितों के खिलाफ है तथा समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम कर रहा है।

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कुलपति ने दिया आश्वासन

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने छात्रों का ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार जो भी कदम उठा रही है, वह छात्रों के हित में ही है। उन्होंने कहा कि छात्रों की बात संबंधित स्तर तक पहुंचाई जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वोपरि है और सभी को उसका सम्मान करना चाहिए। जो भी निर्णय होगा, वह छात्रों और राष्ट्र के हित में ही होगा।
 

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छात्र संघ अध्यक्ष ने रखी बात

छात्र संघ अध्यक्ष कृष्णमोहन शुक्ल ने बताया कि यूजीसी के नए नियमों के विरोध में वे लोग कुलपति से मिलने पहुंचे थे और उन्हें ज्ञापन सौंपा है। कुलपति ने उन्हें आश्वासन दिया है कि छात्रों की बात आगे पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोर्ट का फैसला छात्रों के पक्ष में नहीं आता है, तो आगे आंदोलन या धरना करने का विकल्प भी खुला रहेगा। कृष्णमोहन ने कहा कि पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के साथ है और अब अगला कदम कोर्ट के आगामी निर्णय के अनुसार उठाया जाएगा।

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सरकार पर वोट की राजनीति का आरोप

पूर्व छात्र संघ महामंत्री प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि भाजपा सरकार अब समाज को बांटने की राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा साफ नहीं है और “लड़ाओ और राज करो” की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कहते हैं “बंटोगे तो कटोगे”, लेकिन आज सरकार खुद लोगों को बांटने का काम कर रही है। उनकी मांग है कि इस कानून को जल्द से जल्द वापस लिया जाए।

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छात्रों का आरोप: जोड़ने की बजाय बांटने का काम

प्रदर्शन कर रहे छात्र नेता छोटे सरकार हिमांशु ने आरोप लगाया कि यह नियम समाज और छात्रों को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहा है। छात्रों का कहना है कि सरकार का यह फैसला देशहित में नहीं है और सभी वर्गों के साथ न्याय होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस नियम को पूरी तरह वापस नहीं लिया गया तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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छात्रों के हितों के खिलाफ बताया कानून

शास्त्री के छात्र अतुल पांडे ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया यूजीसी का नया कानून पूरी तरह से छात्रों के हितों के खिलाफ है। यह छात्रों को दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पहले अन्य नीतियों से नुकसान हुआ और अब इस कानून के जरिए एक और आघात किया जा रहा है। भले ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी हो, लेकिन छात्रों की मांग है कि इसे पूरी तरह वापस लिया जाए।

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ज्ञापन देने वालों में ये रहे शामिल

ज्ञापन सौंपने वालों में छात्र संघ अध्यक्ष कृष्णमोहन शुक्ल, महामंत्री लालता प्रसाद मिश्र, छात्र नेता छोटे सरकार हिमांशु, पूर्व छात्र संघ महामंत्री प्रदीप पाण्डेय, साजू योगी, आलोक नाथ, सनातनी, रोहित मिश्र, सत्यजीत तिवारी, राहुल शुक्ल, सुधीर पाण्डेय सहित अन्य छात्र उपस्थित रहे।

छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक यूजीसी के इस नियम को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।