राम मंदिर मामले पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप- मुख्य दोषियों को बचाकर कुछ लोगों को बनाया गया बलि का बकरा
वाराणसी। छत्तीसगढ़ में चातुर्मास व्रत अनुष्ठान पूरा करने के बाद बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती काशी पहुंचे। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों, शहनाई वादन, पुष्पवर्षा और जयकारों के बीच स्वागत किया। ब्रह्मचारी परमात्मानंद की अगुवाई में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके स्वागत के लिए पहुंचे।
केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ पहुंचने पर कमला प्रसाद मिश्र और प्रेमलता मिश्र ने विधि-विधान से उनकी चरण पादुका का पूजन किया और आरती उतारी। रास्ते में भी श्रद्धालुओं ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने का अभियान
श्रीविद्यामठ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि चातुर्मास के बाद उनका प्रमुख अभियान गोमाता के प्राणों की रक्षा और उन्हें ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने को लेकर रहेगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सनातन समाज को जागरूक किया जाएगा और राजनीतिक दलों पर इसे लेकर कदम उठाने का दबाव बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती है तो अन्य राजनीतिक दलों से भी इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया जाएगा। उनके मुताबिक, अभियान के जरिए लोगों को इस विषय पर एकजुट करने का प्रयास किया जाएगा।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर भी दिया बयान
अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि मामले में मुख्य दोषियों को बचाया जा रहा है और कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाया गया है। यह उनका आरोप है; मामले को लेकर जांच और जिम्मेदारी से जुड़े दावे संबंधित जांच प्रक्रिया के अधीन हैं।
मीडिया प्रभारी संजय पांडेय के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नवरात्र के दौरान काशी में ही प्रवास करेंगे। इस अवधि में उनके सानिध्य में विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वागत और कार्यक्रम के दौरान साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदांबा, अनुसूया प्रसाद उनियाल और रवि त्रिवेदी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
