सारनाथ में थाईलैंड की राजकुमारी पिलास कल्यानी ने की भगवान बुद्ध की पूजा, जाम से 45 मिनट फंसा काफिला
वाराणसी: थाईलैंड की राजकुमारी लेफ्टिनेंट जनरल राजकुमारी सिनिनाथ पिलास कल्यानी ने मंगलवार को भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान उन्होंने पुरातात्विक खंडहर परिसर में स्थित धमेख स्तूप की परिक्रमा की और विधिवत पूजा-अर्चना की। राजकुमारी के आगमन को लेकर परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
राजकुमारी बोधगया से सड़क मार्ग के जरिए दोपहर में सारनाथ थाई बौद्ध मंदिर विहार पहुंचीं। यहां प्रभारी भिक्षु मंगलिको और धम्म शिक्षण केंद्र के प्रभारी भिक्षु चंदिमा ने बुद्ध वंदना के साथ उनका स्वागत किया। थाई बौद्ध मंदिर में भिक्षु मंगलिको सहित अन्य बौद्ध भिक्षुओं ने विधिवत पूजा कराई।
इसके बाद राजकुमारी पुरातात्विक खंडहर परिसर पहुंचीं, जहां उन्होंने धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर के अवशेषों का अवलोकन किया। धमेख स्तूप के समक्ष बैठकर कुशीनगर थाई बौद्ध मंदिर के प्रभारी भिक्षु फ्रोम्बाचिरा पोथीवोग ने पूजा कराई, जो लगभग आधे घंटे तक चली।
पूजा के उपरांत राजकुमारी का काफिला राजघाट के लिए रवाना हुआ। इस दौरान भिक्षु गुरु धम्मो, डॉ. धर्म रश्मि, भिक्षु रत्नाकर, भिक्षु अस्सजी सहित दर्जनों बौद्ध भिक्षुओं ने उनका स्वागत किया।
हालांकि, वापसी के समय एक अप्रत्याशित स्थिति सामने आई। शाम को जब राजकुमारी का काफिला धमेख स्तूप परिसर से बाहर निकल रहा था, तब हाइड्रोलिक बैरिकेडिंग जाम हो जाने के कारण रास्ता नहीं खुल सका। इसके चलते करीब 45 मिनट तक काफिला फंसा रहा। अंततः स्थिति न सुलझने पर राजकुमारी अपनी गाड़ी से उतरकर लगभग 250 मीटर पैदल चलकर थाई बौद्ध मंदिर पहुंचीं।
मामले की जानकारी मिलते ही के.के. कंस्ट्रक्शन के सुपरवाइजर मिथलेश मौके पर पहुंचे। कई प्रयासों के बावजूद बैरिकेडिंग नहीं खुली, जिसके बाद युवकों को हाइड्रोलिक पर खड़ा कर अंततः बैरिकेड को खोला जा सका। घटना के बावजूद राजकुमारी का कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
