28 साल का इंतजार खत्म...काशी की बौद्ध विरासत को मिली वैश्विक पहचान, UNESCO सूची में शामिल हुआ सारनाथ
वाराणसी। भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को आखिरकार यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार को इस ऐतिहासिक फैसले की घोषणा की गई। करीब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मिली इस मान्यता के साथ सारनाथ भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा UNESCO विश्व धरोहर स्थल बन गया है।
सारनाथ के विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से न केवल उत्तर प्रदेश की समृद्ध बौद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि पूर्वांचल में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
1998 में टेंटेटिव सूची में हुआ था शामिल
सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की संभावित (Tentative) सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद लंबी प्रक्रिया और मूल्यांकन के बाद अब इसे आधिकारिक रूप से विश्व धरोहर का दर्जा मिला है।
इससे पहले उत्तर प्रदेश में केवल ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी ही UNESCO विश्व धरोहर स्थलों में शामिल थे। सारनाथ के जुड़ने के बाद प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान अब पूर्वांचल तक पहुंच गई है।
चौखंडी स्तूप और पुरातात्विक परिसर को मिली मान्यता
यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त क्षेत्र में चौखंडी स्तूप और सारनाथ का पुरातात्विक परिसर शामिल है। चौखंडी स्तूप उस ऐतिहासिक स्थान का प्रतीक है, जहां भगवान बुद्ध की अपने पांच प्रथम शिष्यों से मुलाकात हुई थी।
वहीं सारनाथ पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष और सम्राट अशोक का प्रसिद्ध स्तंभ शामिल हैं। ये स्मारक बौद्ध धर्म के विकास और इसके वैश्विक विस्तार की ऐतिहासिक कहानी को दर्शाते हैं।
बौद्ध धर्म में सारनाथ का विशेष महत्व
ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने यहीं अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। इसी पवित्र भूमि से बौद्ध संघ की स्थापना हुई और शांति, करुणा तथा मध्यम मार्ग का संदेश पूरी दुनिया में फैला।
करीब 2600 वर्षों से सारनाथ दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों के लिए आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इसे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विरासत स्थलों के संरक्षण और विकास के प्रयासों का यह परिणाम है।
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि UNESCO का दर्जा मिलने से विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है और उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
संरक्षण विशेषज्ञ आभा नारायण लांबा ने कहा कि सारनाथ सिर्फ ऐतिहासिक स्मारकों का समूह नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही जीवंत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का केंद्र है।
सारनाथ को मिली यह मान्यता काशी और पूरे पूर्वांचल के लिए एक गौरवपूर्ण अध्याय माना जा रहा है।
