वाराणसी में बन रहा देश का सबसे बड़ा बर्न इंस्टिट्यूट, स्किन बैंक की सुविधा से बदलेगी जले मरीजों की जिंदगी
वाराणसी। जले हुए मरीजों को बेहतर और अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाराणसी में देश का सबसे बड़ा बर्न इंस्टिट्यूट तैयार किया जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना जंसा क्षेत्र के कुरसातो गांव में तेजी से आकार ले रही है। खास बात यह है कि इस संस्थान में प्रदेश का पहला स्किन बैंक भी स्थापित किया जाएगा, जो पूर्वी भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
करीब 4.6 एकड़ क्षेत्रफल में बनने वाले इस अत्याधुनिक अस्पताल में 126 बेड की सुविधा होगी। इस परियोजना की परिकल्पना प्रसिद्ध बर्न विशेषज्ञ और प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने वर्षों पहले की थी, जो अब साकार होती नजर आ रही है। जी एस मेमोरियल ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी के रूप में उन्होंने बताया कि संस्थान का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
प्रस्तावित बर्न इंस्टिट्यूट में 26 आईसीयू बेड, 6 ऑपरेशन थिएटर, स्किन बैंक, ब्लड बैंक, प्रशिक्षण केंद्र और शोध संस्थान जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां इलेक्ट्रिक बर्न, केमिकल और एसिड बर्न, स्मोक इनहेलेशन, रेडिएशन और कोल्ड बर्न जैसे विभिन्न प्रकार के जख्मों के इलाज के लिए विशेष यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। साथ ही मरीजों के उपचार के लिए ऑक्सीजन चैंबर जैसी आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
अस्पताल में सामाजिक सरोकार को ध्यान में रखते हुए 25 प्रतिशत गरीब मरीजों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज किया जाएगा, जबकि 50 प्रतिशत मरीजों को सरकारी योजनाओं और अस्पताल की सब्सिडी के माध्यम से राहत दी जाएगी। शेष 25 प्रतिशत सक्षम मरीजों से प्राप्त आय को गरीबों के इलाज में लगाया जाएगा, जिससे यह मॉडल आत्मनिर्भरता और सेवा का उदाहरण बनेगा।
इस संस्थान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्किन बैंक होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु के छह घंटे के भीतर त्वचा को सुरक्षित निकालकर विशेष प्रक्रिया के बाद -20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पांच वर्षों तक संरक्षित किया जा सकता है। यह त्वचा गंभीर रूप से जले मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होती है, क्योंकि इससे संक्रमण को रोकने और घाव भरने में मदद मिलती है।
वरिष्ठ सर्जन डॉ. वी. भट्टाचार्य ने बताया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अभी तक इस तरह की उन्नत सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में वाराणसी में बन रहा यह बर्न इंस्टिट्यूट पूरे पूर्वी भारत के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा।
इस अवसर पर चिकित्सा, उद्योग और शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
