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काशी में बन रहा भव्य जगन्नाथ कॉरिडोर, सामने आया फर्स्ट लुक; 108 फीट ऊंचा होगा शिखर
 

 
 काशी में बन रहा भव्य जगन्नाथ कॉरिडोर, सामने आया फर्स्ट लुक; 108 फीट ऊंचा होगा शिखर
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वाराणसी। काशी के दक्षिणी छोर अस्सी क्षेत्र में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर अब भव्य जगन्नाथ कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट ने इसके निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी है और कॉरिडोर का फर्स्ट लुक भी सामने आ गया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बनने वाला यह प्रोजेक्ट धार्मिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम होगा।

कॉरिडोर निर्माण के लिए राजस्थान के धौलपुर से लाल, गुलाबी और सफेद रंग के विशेष पत्थर मंगाए गए हैं। इन पत्थरों का उपयोग मंदिर की दीवारों, फर्श और खूबसूरत नक्काशी में किया जाएगा। धौलपुर के पत्थर अपनी मजबूती और आकर्षक शिल्पकारी के लिए प्रसिद्ध हैं।

108 फीट ऊंचा होगा मंदिर का शिखर

नए जगन्नाथ कॉरिडोर में मंदिर का शिखर 108 फीट ऊंचा बनाया जाएगा, जो दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। मंदिर जाने वाले मार्ग पर सुंदर गार्डन विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही गर्भगृह, यज्ञ मंडप, वेदाध्ययन कक्ष और विशाल प्रांगण भी तैयार होगा।

ट्रस्ट के अनुसार यह पूरा परिसर करीब एक लाख वर्गफीट क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। मंदिर का डिजाइन जगन्नाथपुरी मंदिर की तर्ज पर होगा, लेकिन इसमें वर्तमान मंदिर की झलक भी दिखाई देगी। नागर शैली में बनने वाले इस मंदिर में दो भव्य शिखर होंगे और प्रथम तल का निर्माण भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार शिखर पर जगन्नाथ महाप्रभु की पताका फहराई जाएगी।

3 साल में पूरा होगा निर्माण

जगन्नाथ कॉरिडोर का शिलान्यास 1 मई को हो चुका है। मंदिर ट्रस्ट ने अगले तीन वर्षों में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा है। संभावना जताई जा रही है कि दिसंबर 2029 तक यह कॉरिडोर पूरी तरह तैयार हो जाएगा।

पहले चरण में ट्रस्ट करीब 30 करोड़ रुपये खर्च करेगा, जबकि कुल लागत लगभग 50 करोड़ रुपये आंकी गई है। ट्रस्ट ने बताया कि राम मंदिर की तर्ज पर जनसहयोग और चंदे के माध्यम से धन जुटाया जा रहा है। अब तक लगभग 30 करोड़ रुपये एकत्र भी किए जा चुके हैं।

धौलपुर के शिल्पकार करेंगे निर्माण

अस्सी घाट के समीप स्थित इस मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य धौलपुर के प्रसिद्ध शिल्पकार गिरिराज सैनी करेंगे। मंदिर के तीनों विग्रह यथावत रहेंगे और पूरे परिसर को पारंपरिक आध्यात्मिक स्वरूप में विकसित किया जाएगा।

जानिए मंदिर का गौरवशाली इतिहास

महादेव की नगरी काशी में स्थित जगन्नाथ मंदिर शैव और वैष्णव परंपरा के अद्भुत समन्वय का प्रतीक माना जाता है। इसकी स्थापना की कहानी 17वीं सदी से जुड़ी हुई है।

कहा जाता है कि जगन्नाथपुरी के सेवक और रथयात्रा महोत्सव के प्रबंधक ब्रह्मचारी जी किसी कारणवश पुरी नरेश से नाराज होकर काशी आ गए थे। उन्होंने संकल्प लिया था कि वे केवल भगवान जगन्नाथ का प्रसाद ही ग्रहण करेंगे। इसके बाद पुरी नरेश ने प्रतिदिन पुरी से काशी महाप्रसाद भेजने की व्यवस्था कराई।

उस दौर में साधनों की कमी के कारण कई बार प्रसाद पहुंचने में काफी देरी हो जाती थी और ब्रह्मचारी जी को लंबे उपवास करने पड़ते थे। बताया जाता है कि वर्ष 1790 में लंबे उपवास के दौरान भगवान जगन्नाथ स्वयं उनके स्वप्न में प्रकट हुए और काशी में अपनी स्थापना का आदेश दिया।

इसके बाद भोसला स्टेट के पंडित बेनीराम और दीवान विश्वंभरनाथ के प्रयासों से अस्सी क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ को सकुटुंब स्थापित किया गया। वर्ष 1802 में यहां ऐतिहासिक रथयात्रा मेले की शुरुआत हुई, जो आज भी काशी की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।