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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में वाराणसी फिर नंबर-1, 6 महीने में 4 बार उत्तर प्रदेश में अव्वल

वाराणसी की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए ग्रामीण आजीविका मिशन में पूरे उत्तर प्रदेश में फिर पहला स्थान हासिल किया है। जिले की 11,879 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1.38 लाख महिलाएं कृषि, हस्तशिल्प, सेवाओं और छोटे उद्यमों के जरिए परिवार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं।

 
आत्मनिर्भर
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वाराणसी: काशी की महिलाएं अब सिर्फ घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अपने हुनर और मेहनत के दम पर परिवार की आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गई हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वाराणसी ने एक बार फिर अक्टूबर 2025 की राज्य रैंकिंग में पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की है। पिछले छह महीनों में वाराणसी चार बार प्रथम स्थान और दो बार टॉप-10 में शामिल होकर महिलाओं की निरंतर बढ़ती ताकत और प्रशासनिक दक्षता का शानदार उदाहरण प्रस्तुत कर चुका है।

मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह बताते हैं कि राज्य स्तर की रैंकिंग 37 अलग-अलग पैमानों पर तैयार होती है और इनमें महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना, उन्हें रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराना, कौशल विकास और आजीविका गतिविधियों से जोड़ना, बैंक सखी और उद्यम सखी का चयन, समूहों को बैंक से ऋण उपलब्ध कराना तथा ग्राम संगठनों को मजबूत करना जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होते हैं। इन सभी मापदंडों पर वाराणसी ने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में शीर्ष स्थान सुरक्षित रखा है।

जिले में आज लगभग 11,879 स्वयं सहायता समूहों से 1 लाख 38 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो कृषि, पशुपालन, सब्जी एवं फूलों की खेती, किराना स्टोर, बीसी सखी, विद्युत सखी, दोना-पत्तल निर्माण, टेक-होम राशन प्लांट, ब्यूटी पार्लर, सिलाई-कढ़ाई, सिल्क साड़ी निर्माण, चार मुरब्बा प्रोजेक्ट, जूट बैग निर्माण, काशी प्रेरणा कैफे और ड्रोन सखी जैसी अनेक आजीविकाओं के जरिए न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बना रही हैं, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर रही हैं।

महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार लगातार व्यापक प्रयास कर रही है। सरस मेले और विभिन्न विभागीय मेलों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, साथ ही उनके उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने और ‘काशी प्रेरणा मार्ट’ के माध्यम से बिक्री बढ़ाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा CSR फंड के जरिए महिलाओं को मधुमक्खी पालन, मखाना की खेती, बकरी पालन और बीमा सखी जैसे नए क्षेत्रों से जोड़कर अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षक अंजू देवी बताती हैं कि यह योजना महिलाओं की जिंदगी में वास्तविक बदलाव ला रही है। पहले जो महिलाएं बैंकिंग से कतराती थीं, अब वे आत्मविश्वास के साथ बैंक जाकर सभी सेवाओं का लाभ उठा रही हैं। वहीं चिरईगांव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी अमृता देवी का कहना है कि सरकार ने हुनर को पहचान देने में अहम भूमिका निभाई है। आर्थिक तंगी के कारण जो काम अधूरा था, वह आज सफल व्यवसाय बन चुका है और महिलाएं अपनी पहचान खुद बना रही हैं।

काशी की महिलाओं की यह उपलब्धि न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता यह कदम बताता है कि अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में इतिहास रच सकती हैं।