वाराणसी: दालमंडी में 16 मकानों को नगर निगम ने बताया जर्जर, नोटिस चस्पा
Updated: Apr 28, 2026, 11:22 IST
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वाराणसी के दालमंडी चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। सोमवार रात नगर निगम वाराणसी ने दालमंडी क्षेत्र के 16 मकानों को जर्जर घोषित करते हुए नोटिस चस्पा कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप और लोगों में नाराजगी का माहौल है।
इससे पहले भी नगर निगम 23 मकानों को जर्जर श्रेणी में रख चुका है, जिन्हें बाद में ध्वस्त कर दिया गया था।
16 मकानों को बताया गया असुरक्षित
नगर निगम की प्रशासनिक टीम ने सर्वे के बाद इन भवनों को असुरक्षित और जर्जर श्रेणी में रखा है। अधिकारियों का कहना है कि इन भवनों की संरचना कमजोर हो चुकी है और किसी भी समय हादसा हो सकता है।
नोटिस में भवन स्वामियों को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘मुआवजा देने से बच रही सरकार’
फारुख खान ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की मंशा उचित मुआवजा देने की नहीं है।
उन्होंने कहा, “जब एक साल पहले चिन्हांकन हुआ था, तब किसी मकान को जर्जर नहीं बताया गया था। अब मुआवजे की बात आई तो भवनों को जर्जर घोषित किया जा रहा है।”
मुआवजे को लेकर उठे सवाल
फारुख खान ने दावा किया कि हाल ही में दालमंडी क्षेत्र में एक मकान करीब 1.60 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से बिका, जबकि प्रशासन सिर्फ 44 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा देने की बात कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि उचित मुआवजा नहीं मिला तो लोग अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
नोटिस में क्या कहा गया?
नगर निगम की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के अनुसार भवनों की दीवारें, छत, सीढ़ियां, खिड़कियां और अन्य संरचनाएं क्षतिग्रस्त हैं और आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बन सकती हैं।
प्रशासन ने संभावित हादसे को देखते हुए भवन स्वामियों को जल्द जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले भी नगर निगम 23 मकानों को जर्जर श्रेणी में रख चुका है, जिन्हें बाद में ध्वस्त कर दिया गया था।
16 मकानों को बताया गया असुरक्षित
नगर निगम की प्रशासनिक टीम ने सर्वे के बाद इन भवनों को असुरक्षित और जर्जर श्रेणी में रखा है। अधिकारियों का कहना है कि इन भवनों की संरचना कमजोर हो चुकी है और किसी भी समय हादसा हो सकता है।
नोटिस में भवन स्वामियों को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘मुआवजा देने से बच रही सरकार’
फारुख खान ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की मंशा उचित मुआवजा देने की नहीं है।
उन्होंने कहा, “जब एक साल पहले चिन्हांकन हुआ था, तब किसी मकान को जर्जर नहीं बताया गया था। अब मुआवजे की बात आई तो भवनों को जर्जर घोषित किया जा रहा है।”
मुआवजे को लेकर उठे सवाल
फारुख खान ने दावा किया कि हाल ही में दालमंडी क्षेत्र में एक मकान करीब 1.60 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से बिका, जबकि प्रशासन सिर्फ 44 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा देने की बात कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि उचित मुआवजा नहीं मिला तो लोग अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
नोटिस में क्या कहा गया?
नगर निगम की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के अनुसार भवनों की दीवारें, छत, सीढ़ियां, खिड़कियां और अन्य संरचनाएं क्षतिग्रस्त हैं और आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बन सकती हैं।
प्रशासन ने संभावित हादसे को देखते हुए भवन स्वामियों को जल्द जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
