वाराणसी: यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद जश्न का माहौल, हनुमान चालीसा पाठ और होली खेलकर मनाई खुशी
वाराणसी: सुप्रीम कोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026' पर रोक लगाए जाने के बाद वाराणसी में जश्न का माहौल है। जिला मुख्यालय पर लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के समाप्त होने पर सवर्ण समाज के लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ, हवन-पूजन किया और होली खेलकर खुशी जताई। प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर अपनी खुशी व्यक्त की।
यूजीसी के इन नए नियमों का विरोध मुख्य रूप से इसलिए हो रहा था क्योंकि इन्हें सवर्ण समाज के खिलाफ भेदभावपूर्ण और असमानता बढ़ाने वाला बताया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इन नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला बताते हुए फिलहाल स्थगित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ये प्रावधान अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की गई है, तब तक 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे।
जिला मुख्यालय पर आयोजित धरना समाप्ति समारोह में पूर्वांचल किसान संगठन, हिंदू महासभा, विश्व हिंदू परिषद और केशरिया भारत संगठन सहित कई संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। प्रमुख रूप से केशरिया भारत संगठन के प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडेय, पूर्वांचल किसान संगठन के अध्यक्ष अजीत सिंह, हिंदू महासभा के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत पांडेय, नेशनल पार्टी की अध्यक्ष वंदना सिंह, राष्ट्रीय संस्कार सेवा भारती के अध्यक्ष रघुनाथ उपाध्याय, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रभारी लोकनाथ पांडेय और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष आशुतोष मिश्रा राणा मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और स्पष्ट किया कि जब तक यह इक्विटी रेगुलेशन पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि ये नियम सवर्ण समाज के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और समाज में असमानता बढ़ाएंगे।
इस बीच, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नया विश्वनाथ मंदिर के सामने यूजीसी नियमों के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चला रहे छात्रों को पुलिस ने हटा दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से छात्रों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसका विरोध किया।
सवर्ण समाज के नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे पर आगे भी एकजुट होकर संघर्ष करेंगे और सभी सवर्णों को संगठित करने का प्रयास जारी रखेंगे। उनका मानना है कि नियम के खिलाफ आवाज उठाना समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। वाराणसी में यह विरोध प्रदर्शन सवर्ण समाज की एकता का प्रतीक बनकर उभरा है।
