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9 साल से भारत में फर्जी पहचान के सहारे रह रहा था अफगान नागरिक, वाराणसी एयरपोर्ट पर हुआ गिरफ्तार

वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शारजाह जाने की तैयारी कर रहे एक अफगान नागरिक को फर्जी भारतीय पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया गया। जांच में उसके पास आधार, पैन, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई भारतीय दस्तावेज मिले। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

 
वाराणसी
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वाराणसी: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अफगान नागरिक को फर्जी भारतीय पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब नौ वर्षों से फर्जी पहचान के सहारे भारत में रह रहा था और शारजाह जाने की कोशिश कर रहा था।

इमिग्रेशन जांच में खुली फर्जी पहचान की परतें

जानकारी के अनुसार, आरोपी शनिवार रात शारजाह जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा था। इमिग्रेशन जांच के दौरान उसके पास मौजूद भारतीय पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों पर अधिकारियों को संदेह हुआ। गहन पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद उसकी वास्तविक पहचान सामने आ गई।

पूछताछ में उसने अपना नाम अब्दुल रहमान ताराकी बताया, जो अफगानिस्तान के गजनी का रहने वाला है। भारत में वह रहमान शाह के नाम से पहचान छिपाकर रह रहा था।

आधार, पैन, वोटर आईडी समेत कई भारतीय दस्तावेज मिले

जांच के दौरान आरोपी के पास से केवल फर्जी भारतीय पासपोर्ट ही नहीं, बल्कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाणपत्र और निवास प्रमाणपत्र भी बरामद किए गए। सभी दस्तावेजों में मुंबई का पता दर्ज मिला है।

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने भारत में रहने और विदेश यात्रा करने के उद्देश्य से मुंबई क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के माध्यम से फर्जी तरीके से भारतीय पासपोर्ट बनवाया था।

वाराणसी से आजमगढ़ गया, फिर शारजाह जाने पहुंचा एयरपोर्ट

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी 17 जुलाई को वाराणसी आया था। यहां से वह आजमगढ़ गया और बाद में शारजाह जाने के लिए वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचा, जहां इमिग्रेशन जांच के दौरान उसकी योजना नाकाम हो गई।

आरोपी को भेजा गया जेल, जांच जारी

कार्रवाई के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब यह जांच कर रही हैं कि आरोपी ने फर्जी भारतीय दस्तावेज किस नेटवर्क की मदद से तैयार कराए और इस मामले में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।