वाराणसी: ज्ञानवापी विवाद में मध्यस्थता की कोशिश विफल, दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम
वाराणसी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद के समाधान के लिए मंगलवार को वाराणसी के सिविल कोर्ट स्थित मेडिटेशन सेंटर में मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन पहले ही दिन यह प्रयास विफल हो गया। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम रहे और किसी भी प्रकार के समझौते पर सहमति नहीं बन सकी।
मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे हुई बैठक में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से अपना-अपना दावा वापस लेने की बात कही, लेकिन कोई भी पक्ष अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। इसके चलते मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
हिंदू पक्ष बोला- पूरा मंदिर चाहिए
मध्यस्थता के बाद हिंदू पक्ष ने स्पष्ट कहा कि वह किसी समझौते के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि वे पूरे ज्ञानवापी परिसर पर अपना दावा रखते हैं और उनका उद्देश्य पूरा मंदिर प्राप्त करना है। हिंदू पक्ष का कहना है कि इस विवाद का समाधान केवल उनके दावे के अनुरूप ही संभव है।
मुस्लिम पक्ष ने भी मध्यस्थता से बनाई दूरी
दूसरी ओर, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने पहले ही मध्यस्थता प्रक्रिया से अलग रहने का फैसला किया था। कमेटी का कहना है कि वह इस विवाद का समाधान केवल न्यायालय के अंतिम निर्णय के माध्यम से चाहती है और किसी भी परिस्थिति में मस्जिद को छोड़ने का सवाल नहीं उठता।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
दरअसल, ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद में सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों के सौहार्दपूर्ण समाधान की पहल के तहत सभी पक्षकारों को 14 जुलाई को सिविल कोर्ट के मेडिटेशन सेंटर में उपस्थित होकर मध्यस्थता में भाग लेने का नोटिस जारी किया था। अदालत की मंशा आपसी सहमति से विवाद का समाधान तलाशने की थी।
तीन सदस्यीय समिति कर रही थी प्रक्रिया की निगरानी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ज्ञानवापी से संबंधित सभी फाइलें मध्यस्थता केंद्र से एडीजे-षष्ठम आलोक कुमार की अदालत में स्थानांतरित की गईं। उनकी अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति ने मध्यस्थता की प्रक्रिया की निगरानी की। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मध्यस्थता केंद्र के प्रभारी न्यायाधीश राजीव मुकुल पांडेय भी इस दौरान मौजूद रहे।
अंजुमन इंतजामिया ने जारी किया पत्र
मध्यस्थता से पहले अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से भेजा गया मध्यस्थता का आमंत्रण बाध्यकारी नहीं है। पत्र में कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समाधान समारोह की पहल की है, लेकिन ज्ञानवापी जैसा अत्यंत संवेदनशील मामला आपसी सहमति से सुलझाया जाना संभव नहीं है। इसी कारण कमेटी ने समाधान समारोह में किसी भी स्तर पर शामिल न होने का निर्णय लिया।
अब अदालत की सुनवाई पर टिकी निगाहें
मध्यस्थता की कोशिश असफल रहने के बाद अब दोनों पक्षों की निगाहें न्यायालय की आगामी सुनवाई पर हैं। चूंकि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, ऐसे में इस बहुचर्चित विवाद का समाधान अब न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होने की संभावना है।
