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वाराणसी : कैंट रेलवे स्टेशन का होगा कायाकल्प, 1400 करोड़ की परियोजना में बनेगा 14 प्लेटफॉर्म और 50 मीटर का कॉनकोर्स

वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की करीब 1400 करोड़ रुपये की परियोजना को लेकर रेलवे ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पांच मंजिला भवन, 50 मीटर चौड़ा कॉनकोर्स, 14 प्लेटफॉर्म, अंडरग्राउंड रास्ते और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना को काशी की आगामी 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

 
कैंट रेलवे स्टेशन
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वाराणसी। काशी में बढ़ते पर्यटकों और रेल यात्रियों की संख्या को देखते हुए वाराणसी जंक्शन (कैंट रेलवे स्टेशन) के पुनर्विकास की बड़ी योजना तैयार हो गई है। करीब 1400 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत स्टेशन पर पांच मंजिला भवन बनाया जाएगा। खास बात यह है कि वाराणसी कैंट प्रदेश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन होगा, जहां 50 मीटर चौड़ा कॉनकोर्स विकसित किया जाएगा।

कॉनकोर्स के नीचे कुल 14 प्लेटफॉर्म होंगे। इनमें तीन नए प्लेटफॉर्म प्रस्तावित हैं। स्टेशन पर पहले से मौजूद 12 मीटर चौड़े फुट ओवर ब्रिज को भी कॉनकोर्स से जोड़ा जाएगा। इसके बाद यात्रियों के लिए उपलब्ध कुल कनेक्टिविटी क्षेत्र करीब 62 मीटर का हो जाएगा।

रेलवे ने इस परियोजना का खाका वाराणसी की आने वाले करीब 50 वर्षों की यात्री जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। रविवार को रेलवे बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठक में परियोजना को लेकर मंथन किया गया। अब जल्द ही रेल मंत्रालय की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

यात्रियों की बढ़ती संख्या ने बढ़ाई जरूरत

काशी विश्वनाथ धाम के नए स्वरूप में आने के बाद वाराणसी में पर्यटकों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में पर्यटकों की संख्या करीब एक करोड़ से बढ़कर आठ करोड़ तक पहुंचने का असर रेलवे यातायात पर भी पड़ा है।

वाराणसी जंक्शन पर रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों की औसत संख्या बढ़कर करीब 1.5 लाख हो गई है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने करीब ढाई साल पहले स्टेशन के पुनर्विकास की रणनीति पर काम शुरू किया था। अब यह योजना बड़े प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ रही है।

पांच मंजिला भवन में होंगी कई सुविधाएं

प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना के तहत स्टेशन का भवन पांच मंजिला होगा। यात्रियों की सुविधा के लिए अलग-अलग स्तर पर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्रथम तल: यहां मुख्य कॉनकोर्स होगा। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर आने के बाद यात्रियों को कॉनकोर्स से प्लेटफॉर्म तक जाने की सुविधा मिलेगी। द्वितीय तल: रेलवे के प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय बनाए जाएंगे। तृतीय तल और उससे ऊपर: यात्री आश्रय, होटल और अन्य यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

दो अंडरग्राउंड रास्ते और पार्किंग की सुविधा

स्टेशन के पुनर्विकास की योजना में यातायात को सुगम बनाने के लिए अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत दो प्रमुख अंडरग्राउंड रास्ते प्रस्तावित हैं। पहला मार्ग चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे से कैंट रेलवे स्टेशन को जोड़ेगा। दूसरा अंडरग्राउंड रास्ता काशी विद्यापीठ से कैंट रेलवे स्टेशन तक बनाया जाएगा।

इसके अलावा स्टेशन परिसर में अंडरग्राउंड पार्किंग की सुविधा भी विकसित की जाएगी। इससे स्टेशन के आसपास वाहनों के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

छावनी परिषद और टाटा कैंसर संस्थान से भी जुड़ेगा स्टेशन

यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए स्टेशन को आसपास के महत्वपूर्ण स्थानों से फुट ओवर ब्रिज के जरिए जोड़ने की भी योजना है।

छावनी परिषद क्षेत्र, दैनिक जागरण कार्यालय की ओर से एक एफओबी मार्ग रेलवे स्टेशन से जुड़ेगा। वहीं, दूसरा फुट ओवर ब्रिज टाटा कैंसर संस्थान से कैंट रेलवे स्टेशन को जोड़ेगा।

काशी रेलवे स्टेशन भी बनेगा कैंट का सैटेलाइट स्टेशन

भविष्य में काशी रेलवे स्टेशन को वाराणसी जंक्शन का सैटेलाइट स्टेशन बनाने की योजना है। काशी रेलवे स्टेशन का भी करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास कराया जा रहा है।

वर्तमान योजना के तहत काशी रेलवे स्टेशन पर छह प्लेटफॉर्म और 10 रेलवे लाइनें विकसित की जा रही हैं। वाराणसी कैंट स्टेशन के पुनर्विकास के दौरान यह स्टेशन यात्री और ट्रेनों के संचालन में सहायक भूमिका निभाएगा।

वाराणसी में पर्यटन और यात्री दबाव लगातार बढ़ने के बीच कैंट स्टेशन के इस पुनर्विकास को शहर के भविष्य के परिवहन ढांचे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही, कनेक्टिविटी और सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।