वाराणसी कोर्ट परिसर का होगा विस्तारीकरण, शिफ्टिंग को लेकर दो बार एसोसिएशन आमने-सामने
वाराणसी कोर्ट परिसर का होगा विस्तारीकरण, शिफ्टिंग को लेकर दो बार एसोसिएशन आमने-सामने
Jun 2, 2026, 10:15 IST
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उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद का न्यायालय परिसर पूर्वांचल की न्यायिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। इन दिनों न्यायालय परिसर के विस्तार और संभावित स्थानांतरण को लेकर अधिवक्ताओं के बीच बहस तेज हो गई है। स्थिति यह है कि न्यायालय परिसर की दो प्रमुख संस्थाएं-सेंट्रल बार एसोसिएशन और बनारस बार एसोसिएशन—इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गई हैं।
सेंट्रल बार एसोसिएशन ने कचहरी स्थित वर्तमान न्यायालय परिसर के विस्तार के लिए शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल के पास प्रस्तावित नए न्यायालय परिसर का स्वागत किया है। वहीं, बनारस बार एसोसिएशन इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है और इसके खिलाफ शहर के विभिन्न हिस्सों में हस्ताक्षर अभियान और जनजागरण कार्यक्रम चला रही है।
सेंट्रल बार ने किया प्रस्ताव का समर्थन
सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गौतम का कहना है कि यह वाराणसी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उनके अनुसार, वर्तमान न्यायालय परिसर की सीमित जगह को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस नए न्यायालय परिसर की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित परिसर में अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक लाइब्रेरी, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, अलग-अलग कोर्ट रूम, वाहन पार्किंग सहित कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उनका दावा है कि यह परियोजना अगले तीन वर्षों में पूरी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वर्तमान प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया, तो भविष्य में न्यायालय परिसर को शहर से और अधिक दूर स्थानांतरित किए जाने का विकल्प सामने आ सकता है।
बनारस बार ने जताया विरोध
दूसरी ओर, बनारस बार एसोसिएशन इस प्रस्ताव का लगातार विरोध कर रही है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का कहना है कि इस विषय को राजनीतिक दृष्टिकोण से उछाला जा रहा है और फिलहाल न तो न्यायपालिका और न ही शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने आया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान न्यायालय परिसर शहर के केंद्र में स्थित है, जिससे अधिवक्ताओं, वादकारियों और आम लोगों को आसानी से पहुंचने की सुविधा मिलती है। यदि न्यायालय को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है, तो इससे अधिवक्ताओं और आम जनता दोनों को असुविधा होगी।
विनोद शुक्ला का यह भी कहना है कि यदि विस्तार की आवश्यकता है, तो वर्तमान परिसर के आसपास उपलब्ध भूमि का उपयोग कर न्यायालय का विस्तार किया जा सकता है, बजाय इसके कि पूरे परिसर को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाए।
अधिवक्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना मामला
न्यायालय परिसर के विस्तार को लेकर दोनों बार एसोसिएशनों के अलग-अलग रुख ने वाराणसी के अधिवक्ताओं के बीच नई बहस छेड़ दी है। एक पक्ष इसे आधुनिक न्यायिक व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अधिवक्ता हितों और आम जनता की सुविधा के खिलाफ बता रहा है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भविष्य में शासन और न्यायपालिका इस मुद्दे पर क्या फैसला लेते हैं और वाराणसी की कचहरी का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ता है।
सेंट्रल बार एसोसिएशन ने कचहरी स्थित वर्तमान न्यायालय परिसर के विस्तार के लिए शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल के पास प्रस्तावित नए न्यायालय परिसर का स्वागत किया है। वहीं, बनारस बार एसोसिएशन इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है और इसके खिलाफ शहर के विभिन्न हिस्सों में हस्ताक्षर अभियान और जनजागरण कार्यक्रम चला रही है।
सेंट्रल बार ने किया प्रस्ताव का समर्थन
सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गौतम का कहना है कि यह वाराणसी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उनके अनुसार, वर्तमान न्यायालय परिसर की सीमित जगह को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस नए न्यायालय परिसर की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित परिसर में अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक लाइब्रेरी, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, अलग-अलग कोर्ट रूम, वाहन पार्किंग सहित कई सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उनका दावा है कि यह परियोजना अगले तीन वर्षों में पूरी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वर्तमान प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया, तो भविष्य में न्यायालय परिसर को शहर से और अधिक दूर स्थानांतरित किए जाने का विकल्प सामने आ सकता है।
बनारस बार ने जताया विरोध
दूसरी ओर, बनारस बार एसोसिएशन इस प्रस्ताव का लगातार विरोध कर रही है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद शुक्ला का कहना है कि इस विषय को राजनीतिक दृष्टिकोण से उछाला जा रहा है और फिलहाल न तो न्यायपालिका और न ही शासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने आया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान न्यायालय परिसर शहर के केंद्र में स्थित है, जिससे अधिवक्ताओं, वादकारियों और आम लोगों को आसानी से पहुंचने की सुविधा मिलती है। यदि न्यायालय को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है, तो इससे अधिवक्ताओं और आम जनता दोनों को असुविधा होगी।
विनोद शुक्ला का यह भी कहना है कि यदि विस्तार की आवश्यकता है, तो वर्तमान परिसर के आसपास उपलब्ध भूमि का उपयोग कर न्यायालय का विस्तार किया जा सकता है, बजाय इसके कि पूरे परिसर को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाए।
अधिवक्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना मामला
न्यायालय परिसर के विस्तार को लेकर दोनों बार एसोसिएशनों के अलग-अलग रुख ने वाराणसी के अधिवक्ताओं के बीच नई बहस छेड़ दी है। एक पक्ष इसे आधुनिक न्यायिक व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे अधिवक्ता हितों और आम जनता की सुविधा के खिलाफ बता रहा है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भविष्य में शासन और न्यायपालिका इस मुद्दे पर क्या फैसला लेते हैं और वाराणसी की कचहरी का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ता है।
