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वाराणसी में गर्भवती महिलाओं के लिए शुरू हुई 'ई-साथी' सेवा, अब WhatsApp पर मिलेगी हर जरूरी स्वास्थ्य जानकारी

वाराणसी में गर्भवती और प्रसवोत्तर महिलाओं के लिए 'ई-साथी' व्हाट्सऐप आधारित डिजिटल स्वास्थ्य सेवा शुरू हुई है। इसके जरिए गर्भावस्था, पोषण, सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशु की देखभाल से जुड़ी जानकारी घर बैठे मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग ने छह महीने में 25 हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

 
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वाराणसी: गर्भवती और प्रसव के बाद की महिलाओं को समय पर सही स्वास्थ्य सलाह उपलब्ध कराने के लिए वाराणसी में 'ई-साथी' डिजिटल स्वास्थ्य पहल शुरू की गई है। स्वास्थ्य विभाग की इस नई पहल के तहत महिलाओं को व्हाट्सऐप के माध्यम से गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव, पोषण और नवजात शिशु की देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सीधे उनके मोबाइल पर भेजी जाएगी। विभाग का लक्ष्य अगले छह महीनों में जिले की 25 हजार महिलाओं को इस सेवा से जोड़ने का है।

WhatsApp के जरिए मिलेगी हर जरूरी स्वास्थ्य सलाह

'ई-साथी' एक व्हाट्सऐप आधारित डिजिटल हेल्थ सेवा है, जिसे खास तौर पर गर्भवती और प्रसवोत्तर महिलाओं के लिए तैयार किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर महिलाओं को उनकी गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भेजी जाएगी।

सेवा के माध्यम से गर्भावस्था की देखभाल, संतुलित पोषण, सुरक्षित प्रसव, खतरे के लक्षण, नवजात शिशु की देखभाल और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सुझाव टेक्स्ट, ऑडियो और तस्वीरों के रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे। महिलाएं इस सेवा के जरिए अपनी प्रतिक्रिया भी साझा कर सकेंगी।

छह महीने में 25 हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य

अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. एन.डी. शर्मा ने बताया कि अगले छह महीनों में वाराणसी की करीब 25 हजार गर्भवती और प्रसवोत्तर महिलाओं को 'ई-साथी' से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक महिला को उसकी गर्भावस्था के चरण के अनुसार व्यक्तिगत रूप से उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वह समय पर सही निर्णय ले सके और किसी भी स्वास्थ्य जोखिम से बचाव संभव हो सके।

इन विषयों पर मिलेगी विस्तृत जानकारी

ई-साथी के माध्यम से महिलाओं को कई महत्वपूर्ण विषयों पर नियमित जानकारी दी जाएगी। इसमें शामिल हैं-

प्रसवपूर्व जांच (ANC) का महत्व
गर्भावस्था में संतुलित और पौष्टिक आहार
गर्भावस्था के दौरान खतरे के संकेतों की पहचान
सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव
नवजात शिशु की देखभाल

प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य से जुड़े आवश्यक सुझाव

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर सही जानकारी मिलने से महिलाओं की जागरूकता बढ़ेगी और वे बेहतर स्वास्थ्य संबंधी फैसले ले सकेंगी।

आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें महिलाओं को इस सेवा से जोड़ने, तकनीकी सहायता देने और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही तरीके से पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

योजना की सफलता और प्रभाव का आकलन समय-समय पर सर्वे और साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा।

मातृ और नवजात मृत्यु दर कम करने पर विशेष फोकस

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 'ई-साथी' पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी फैसले लेने के लिए सशक्त बनाना है। इसके जरिए सुरक्षित एवं संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही मातृ एवं नवजात मृत्यु दर और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं में कमी लाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने की यह पहल भविष्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।