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वाराणसी के सरकारी स्कूल में बच्चों से कराई सफाई, वीडियो वायरल: शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
 

 
 वाराणसी के सरकारी स्कूल में बच्चों से कराई सफाई, वीडियो वायरल: शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
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वाराणसी। विकासखंड चोलापुर के ग्राम पंचायत जगदीशपुर स्थित हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण शिक्षकों ने छोटे बच्चों से ही स्कूल परिसर और कक्षाओं की सफाई कराई। इस दौरान बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बच्चे किताबों की जगह झाड़ू थामे सफाई करते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में लगभग एक दर्जन बच्चे स्कूल के आंगन में झाड़ू लगाते, कूड़ा इकट्ठा करते और कचरा डालते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य देखकर अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। गांव में तैनात तीन सफाई कर्मी कई दिनों से ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, जिससे स्कूल की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। मजबूरी में शिक्षकों ने बच्चों को सफाई का काम सौंप दिया। एक स्थानीय युवक ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिससे मामला सुर्खियों में आ गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार जहां बाल अधिकारों, बेहतर शिक्षा और स्वच्छ वातावरण की बात करती है, वहीं हकीकत में ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के बजाय सफाई का काम सौंपना उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए हानिकारक है। यह घटना सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है।

खंड शिक्षा अधिकारी नागेंद्र सरोज ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षकों द्वारा छात्रों से सफाई कराना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने इसकी गंभीरता को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट भेज दी है और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

यह घटना सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है। यदि सफाई कर्मचारी समय पर ड्यूटी नहीं निभाते, तो इसका असर सीधे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ता है। अब शिक्षा विभाग से यह उम्मीद की जा रही है कि न केवल दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाएं न केवल शिक्षा तंत्र को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं। सभी स्तरों पर मिलकर प्रयास करने की जरूरत है ताकि बच्चे सुरक्षित, स्वच्छ और पढ़ाई-अनुकूल वातावरण में अपनी शिक्षा प्राप्त कर सकें।