वाराणसी : बेटी पर करोड़ों की संपत्ति हड़पने का आरोप, बुजुर्ग मां ने मांगी इच्छा मृत्यु
Varanasi : शिवपुर इलाके में एक दिल दहला देने वाला पारिवारिक विवाद सामने आया है, जहां 75 वर्षीय मीना सिंह ने अपनी ही बेटी डॉ. रुचि सिंह की लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है। मीना और उनके 80 वर्षीय पति सुरेंद्र नाथ सिंह ने बेटी पर धोखे से करोड़ों की संपत्ति हड़पने, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद 24 फरवरी की रात हमला होने से मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस ने FIR दर्ज की है, लेकिन पीड़िता का कहना है कि कहीं सुनवाई नहीं हो रही।
रात 12 बजे हुआ हमला, 112 पर कॉल कर बचाई जान
मीना सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के 17 फरवरी के आदेश की जानकारी मिलते ही बेटी रुचि सिंह, नाती काव्यांश सिंह, नौकर कालू और धीरज सिंह ने रात 12:15 बजे उन पर हमला कर दिया। मीना ने कहा कि मारपीट की, चोट पहुंचाई और जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर कॉल की, जिसके बाद पुलिस आई और उन्हें थाने ले गई। पीड़िता ने तहरीर दी, लेकिन आरोप है कि पुलिस कार्रवाई में ढिलाई बरत रही है।

कैसे शुरू हुआ विवाद? धोखे से हड़पी करोड़ों की संपत्ति
मामला 2022 का है, जब बेटी ने कथित तौर पर घर पर ही रजिस्ट्री अधिकारियों को बुलाकर चार दान-पत्र तैयार करवाए और पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। बुजुर्ग दंपति को इसकी जानकारी बिजली बिल में नाम बदलने से हुई। विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज, लाइसेंसी असलहे से डराना और जेवर-नकदी छीनने के आरोप लगे। बैंक से 1.5 से 2 करोड़ रुपये निकाल लिए गए। 14 जनवरी 2026 को शिवपुर थाने में FIR दर्ज हुई, जिसमें धारा 420 (धोखाधड़ी), 506 (धमकी) समेत अन्य धाराएं शामिल हैं। जांच SI को सौंपी गई।
सिविल कोर्ट से राहत न मिलने पर दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 17 फरवरी को कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए 23 अप्रैल 2026 तक घर से बेदखल करने और संपत्ति ट्रांसफर पर रोक लगा दी। 21 फरवरी को सिविल कोर्ट ने भी इस आदेश की पुष्टि की।
मीना सिंह की भावुक अपील: "PM जी, न्याय दो या मौत"
प्रताड़ना से तंग मीना सिंह ने कहा कि रोज प्रताड़ित करती है। इस उम्र में हम कितना मार खाएं? कितनी बार शिकायत करें? कोई सुनने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि घर में खाना बनाने नहीं दिया जाता, शाकाहारी होने के बावजूद मांस-मछली रखकर परेशान किया जाता है। अब बाहर से टिफिन मंगवाकर गुजारा करना पड़ता है। भावुक होते हुए बोलीं कि मैं एसपी, सीपी से कह चुकी हूं कि मुझे इच्छा मृत्यु दे दीजिए। अब प्रधानमंत्री जी से हाथ जोड़कर कहती हूं कि या तो मुझे न्याय दिला दें या मुझे मृत्यु दे दें। मैं अब और नहीं सह सकती।
अधिवक्ता का दावा: कोर्ट आदेश का उल्लंघन, अवमानना का केस बनेगा
पीड़ित पक्ष के वकील शुभम सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि 23 अप्रैल तक बेदखल नहीं किया जाएगा और संपत्ति किसी तीसरे को नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद प्रताड़ना जारी है, जो अदालत की अवमानना है। हम हरसंभव न्याय दिलाएंगे। उन्होंने पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

