अब सुरक्षित होगा गंगा स्नान: भीड़-भाड़ी और गहरे पानी वाले घाटों पर लगेंगे सेफ्टी नेट और फ्लोटिंग बैरिकेडिंग
वाराणसी के गंगा घाटों पर डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए खतरनाक घाटों पर फ्लोटिंग बैरिकेडिंग, सेफ्टी नेट और वॉच टावर लगाए जा रहे हैं। पिछले चार वर्षों में 152 लोगों की मौत के बाद जल पुलिस ने व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया है।
वाराणसी: गंगा घाटों पर होने वाली डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए अब बड़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। जल पुलिस ने खतरनाक और गहरे घाटों पर फ्लोटिंग बैरिकेडिंग और सेफ्टी नेट लगाने की योजना को तेजी से अमल में लाना शुरू कर दिया है। इनमें से 11 घाटों पर यह व्यवस्था लागू भी हो चुकी है, जबकि शेष घाटों पर काम अंतिम चरण में है।
हर साल बढ़ती घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
गंगा घाटों पर मई से जुलाई के बीच डूबने की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 152 लोगों की जान डूबने से जा चुकी है, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं। वर्ष 2022 में 37, 2023 में 46, 2024 में 37 और 2025 में 32 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इन लगातार बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।
नमो घाट से रविदास घाट तक रहेगा सुरक्षा घेरा
जल पुलिस ने नमो घाट से रविदास घाट तक करीब नौ किलोमीटर के क्षेत्र को विशेष रूप से चिन्हित किया है, जहां डूबने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इसके अलावा डोमरी गांव के सामने नया खतरनाक स्पॉट भी सामने आया है, जहां हाल के दो महीनों में चार लोगों की मौत हो चुकी है।
वॉच टावर और फ्लोटिंग जेटी से होगी निगरानी मजबूत
सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए नौ प्रमुख घाटों पर वॉच टावर लगाए जा रहे हैं, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। वहीं आठ घाटों पर फ्लोटिंग जेटी भी स्थापित की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत बचाव कार्य किया जा सके।
इन घाटों पर लगाए जा रहे हैं सुरक्षा इंतजाम
अस्सी घाट, तुलसी घाट, जानकी घाट, केदार घाट, हनुमान घाट, दशाश्वमेध घाट, मीर घाट, सिंधिया घाट, पंचगंगा घाट समेत कई प्रमुख घाटों पर फ्लोटिंग बैरिकेडिंग और जाल लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही साइनेज और अन्य चेतावनी बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को पहले से सतर्क किया जा सके।
एसीपी जल पुलिस अतुल अंजान त्रिपाठी के अनुसार, घाटों पर सुरक्षा और बचाव को लेकर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। फ्लोटिंग बैरिकेडिंग, सेफ्टी नेट, वॉच टावर और साइनेज जैसे उपायों से डूबने की घटनाओं में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
