रिश्वतखोर GST उपायुक्त अंबिका सिंह जेल भेजी गई, चालाकी नहीं आई काम, विजिलेंस ट्रैप की पूरी कहानी आई सामने
वाराणसी में जीएसटी उपायुक्त अंबिका सिंह को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते विजिलेंस टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। शिकायतकर्ता उद्यमी की सतर्कता और विजिलेंस की कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार के इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की बड़ी कार्रवाई में जीएसटी विभाग की उपायुक्त अंबिका सिंह को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के मामले में अब न्यायिक कार्रवाई भी तेज हो गई है। गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया। इस कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
रिश्वत मांगने की शिकायत के बाद बिछाया गया जाल
मामले की शुरुआत वर्ष 2023 के जीएसटी रिटर्न से जुड़े एक नोटिस से हुई। उद्यमी अजय मौर्य को 21 मार्च को नोटिस जारी किया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने 27 अप्रैल को पोर्टल पर अपना स्पष्टीकरण अपलोड कर दिया।
आरोप है कि फाइल के निस्तारण के नाम पर उपायुक्त अंबिका सिंह ने पहले एक लाख रुपये की मांग की, जिसे बाद में घटाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया। दूसरी बार 9 जुलाई को बुलाकर भी उनसे रिश्वत मांगी गई। इसके बाद उद्यमी ने विजिलेंस से शिकायत करने का फैसला किया।
लिफाफे में रुपये लेने की बनाई योजना, लेकिन नहीं बच सकीं
रिश्वत लेते समय अंबिका सिंह ने सीधे पैसे लेने के बजाय शिकायतकर्ता से पहले बाजार से लिफाफा खरीदकर उसमें रुपये रखकर लाने को कहा। इसी दौरान विजिलेंस टीम ने शिकायतकर्ता को संकेत देकर लिफाफे पर विशेष रासायनिक पाउडर लगवाया।
जैसे ही शिकायतकर्ता रुपये से भरा लिफाफा लेकर पहुंचा और अंबिका सिंह ने उसे अपने हाथ में लिया, पहले से घात लगाए बैठी विजिलेंस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
गोपनीय जांच के बाद मिली थी ट्रैप की अनुमति
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद मामले की गोपनीय जांच कराई गई। जांच में अंबिका सिंह की छवि एक स्वच्छ लोक सेवक के रूप में नहीं पाई गई। इसके बाद शासन से ट्रैप कार्रवाई की अनुमति ली गई।
कार्रवाई का पूरा ऑपरेशन उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, वाराणसी की टीम ने अंजाम दिया। इस संबंध में सीओ विजिलेंस राजेश कुमार वर्मा की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया।
ऐसे आगे बढ़ा पूरा मामला
21 मार्च: वर्ष 2023 के जीएसटी रिटर्न से संबंधित नोटिस जारी। 27 अप्रैल को उद्यमी ने पोर्टल पर स्पष्टीकरण अपलोड किया। 9 जुलाई को फाइल निस्तारण के लिए कथित तौर पर पहले 1 लाख, बाद में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। 10 जुलाई को उद्यमी ने विजिलेंस से शिकायत की।
13 जुलाई को शासन से ट्रैप कार्रवाई की अनुमति मिली। 15 जुलाई को विजिलेंस ने रिश्वत लेते समय अंबिका सिंह को गिरफ्तार किया। 16 जुलाई को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
जेल की पहली रात महिला बैरक में रहीं गुमसुम
जिला जेल पहुंचने के बाद अंबिका सिंह को महिला बैरक में रखा गया। जेल सूत्रों के अनुसार, वह पहले दिन काफी शांत रहीं और उन्होंने नाममात्र का भोजन किया। जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी बंदियों के साथ समान नियम लागू होते हैं।
उद्यमी बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे भी आवाज उठाऊंगा
शिकायतकर्ता उद्यमी अजय मौर्य ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का उनका फैसला सही साबित हुआ। उन्होंने कहा कि आगे भी किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ वह खुलकर आवाज उठाते रहेंगे। अजय की कंपनी इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति का कार्य करती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है परिवार
जानकारी के अनुसार, अंबिका सिंह का परिवार राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके पिता सर्व सुख सिंह राजनीति में सक्रिय रहे और कई चुनाव जीत चुके हैं। उनके भाई दिल्ली कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं, जबकि उनके पति नोएडा में इंजीनियर हैं।
भ्रष्टाचार के मामलों पर विजिलेंस की सख्ती जारी
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। शिकायत मिलने पर गोपनीय जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
