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IGRS शिकायतों में बड़ी लापरवाही! वाराणसी में 6 अफसरों-कर्मचारियों पर गिरी गाज, लेखपाल निलंबित

वाराणसी में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। छह अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन, वेतन रोकने, नोटिस और अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। डीएम ने भविष्य में सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

 
वाराणसी
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वाराणसी: जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर वाराणसी जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की समीक्षा के दौरान कई मामलों में बिना स्थलीय जांच और शिकायतकर्ता से संपर्क किए ही शिकायतों का निस्तारण किए जाने का मामला सामने आया। इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर छह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन, वेतन रोकने, कारण बताओ नोटिस और अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

सरकारी जमीन के मामले में गलत रिपोर्ट, लेखपाल निलंबित

समीक्षा के दौरान राजातालाब तहसील के सेवापुरी निवासी मनोज कुमार की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत की जांच में गंभीर खामी मिली। संबंधित लेखपाल ने गलत आराजी संख्या का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट भेज दी थी। जांच में गलती सामने आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई और उप जिलाधिकारी राजातालाब ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

निवास प्रमाणपत्र मामले में भी मिली लापरवाही

चिरईगांव विकासखंड के नवापुर (सथवा) निवासी अजय कुमार चौधरी की शिकायत में उनके पुत्र और पत्नी के निवास प्रमाणपत्र गलत तरीके से निरस्त किए जाने का मामला सामने आया। जांच में पता चला कि संबंधित लेखपाल ने अभिलेखों का सत्यापन किए बिना ही रिपोर्ट लगा दी थी। इस मामले में भी संबंधित लेखपाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई।

बिना मौके पर पहुंचे भेज दी रिपोर्ट, वेतन रोका गया

हरहुआ क्षेत्र की ग्रामसभा से जुड़ी शिकायत में ग्राम पंचायत अधिकारी ने न तो मौके पर जाकर जांच की और न ही शिकायतकर्ता से संपर्क किया। इसके बावजूद शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी ने संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और जुलाई माह का वेतन रोक दिया।

सीवर लाइन की शिकायतों में भी मिली अनदेखी

फुलवरिया और सदर क्षेत्र में नई सीवर लाइन बिछाने की मांग से जुड़ी दो शिकायतों में जल निगम (नगरीय) के अधिकारियों ने भी बिना शिकायतकर्ताओं से संपर्क किए रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट में केवल यह उल्लेख किया गया कि परियोजना शासन को भेजी जा चुकी है और स्वीकृति मिलने के बाद कार्य कराया जाएगा। इस मामले में संबंधित अवर अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

सारनाथ सीएचसी और बस सेवा की शिकायतों पर भी कार्रवाई

सारनाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों और सुरक्षा गार्ड पर पैसे मांगने तथा इलाज नहीं करने की शिकायत की समीक्षा के बाद जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को सुरक्षा गार्ड को तत्काल निलंबित करने और संबंधित चिकित्सकों से स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, निजी बस में टिकट बुक होने के बावजूद सीट उपलब्ध न कराने की शिकायत का भी बिना उचित समाधान किए निस्तारण कर दिया गया था। इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

डीएम की दो टूक, अब औपचारिक निस्तारण नहीं चलेगा

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त प्रत्येक शिकायत का निस्तारण केवल औपचारिकता निभाने के लिए नहीं किया जाएगा। सभी शिकायतों में स्थलीय निरीक्षण, शिकायतकर्ता से सीधा संवाद और तथ्यों के सत्यापन के बाद ही अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।