लमही में बनेगा विश्वस्तरीय प्रेमचंद संग्रहालय, डिजिटल तकनीक से जीवंत होंगी कहानियां, दिखेंगी दुर्लभ तस्वीरें, पांडुलिपियां और रचनाएं
वाराणसी के लमही में मुंशी प्रेमचंद की स्मृतियों को आधुनिक तकनीक से संजोने के लिए 4.22 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक संग्रहालय विकसित किया जाएगा। डिजिटल डिस्प्ले, ऑडियो-वीडियो गैलरी, दुर्लभ तस्वीरें, पांडुलिपियां और इंटरेक्टिव तकनीक के जरिए प्रेमचंद के साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।
वाराणसी: हिंदी कथा साहित्य के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही को जल्द ही साहित्यिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। प्रेमचंद की स्मृतियों और साहित्यिक विरासत को आधुनिक तकनीक से संरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने 4.22 करोड़ रुपये की लागत से संग्रहालय के आंतरिक साज-सज्जा और प्रदर्शनी कार्य के लिए निविदा जारी की है। परियोजना को पूरा करने के लिए 12 महीने की समयसीमा तय की गई है।
नए स्वरूप में तैयार होने वाला संग्रहालय केवल दुर्लभ वस्तुओं को देखने की जगह नहीं होगा, बल्कि डिजिटल तकनीक के जरिए आगंतुकों को प्रेमचंद के जीवन, उनके समय और उनकी कालजयी रचनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
डिजिटल स्क्रीन पर दिखेगी प्रेमचंद की पूरी कहानी
संग्रहालय में आधुनिक डिजिटल डिस्प्ले, ऑडियो-वीडियो गैलरी और इंटरेक्टिव तकनीक विकसित की जाएगी। इसके जरिए आगंतुक प्रेमचंद के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, दुर्लभ पांडुलिपियों और तस्वीरों को डिजिटल स्क्रीन पर देख सकेंगे।
प्रेमचंद की रचनाओं से जुड़े दृश्यात्मक प्रस्तुतिकरण भी संग्रहालय का हिस्सा होंगे। इससे साहित्य को केवल पढ़ने के बजाय उसे एक अनुभव के रूप में समझने का अवसर मिलेगा।
'ईदगाह' के हामिद से 'पूस की रात' के हल्कू तक दिखेगी साहित्यिक दुनिया
प्रेमचंद ने अपने साहित्य में भारतीय समाज के संघर्ष, गरीबी, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक विषमता को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं के पात्र आज भी पाठकों के बीच उतने ही जीवंत हैं।
'ईदगाह' का हामिद अपनी दादी के लिए खिलौने के बजाय चिमटा खरीदकर त्याग और संवेदना की मिसाल बनता है। वहीं 'पूस की रात' का हल्कू किसान की गरीबी और संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है। 'कफन' और 'गोदान' जैसी रचनाओं में सामाजिक असमानता, शोषण और मानवीय विडंबनाओं को प्रमुखता से सामने रखा गया है। अब इन्हीं रचनाओं और पात्रों को आधुनिक संग्रहालय में नई तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करने की तैयारी है।
शोधार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा संग्रहालय
परियोजना में संग्रहालय को साहित्य शोध के लिहाज से भी उपयोगी बनाने की योजना है। यहां शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लमही केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि प्रेमचंद के साहित्य और हिंदी कथा परंपरा पर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान बन सकता है।
रिसर्च से लेकर प्रदर्शनी और आईटी सिस्टम तक होंगे कई काम
संग्रहालय के विकास कार्य में कई स्तरों पर काम किया जाएगा। इसमें रिसर्च, डिजाइन, डेटा कलेक्शन, डिजिटल डिस्प्ले, ऑडियो-वीडियो और आईटी कार्य शामिल हैं। इसके अलावा सिविल निर्माण, रेन वाटर पाइप, इलेक्ट्रिकल और पेंटिंग कार्य भी कराए जाएंगे। प्रदर्शनी के लिए शोकेस, पोडियम, वॉल पैनलिंग, पार्टिशन, क्यूरेटर कार्यालय और फर्नीचर की व्यवस्था भी परियोजना का हिस्सा है।
अधीक्षण अभियंता प्रशांत वर्धन के अनुसार, उद्देश्य केवल संग्रहालय में वस्तुओं को प्रदर्शित करना नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रेमचंद के साहित्य और उनकी विरासत को लोगों के लिए जीवंत अनुभव में बदलना है।
