Movie prime

डेढ़ साल में ही कबाड़ घोषित हुईं करोड़ों की गाड़ियां, नगर निगम के तीन कर्मचारी सस्पेंड

वाराणसी नगर निगम में नई और महंगी गाड़ियों को समय से पहले ‘डेड’ घोषित कर स्क्रैप सूची में डालने का मामला सामने आया है। नगर आयुक्त ने तीन कर्मचारियों को निलंबित कर जांच के आदेश दिए हैं। निरीक्षण में भारी लापरवाही और वित्तीय नुकसान के संकेत मिले।

 
नगर निगम
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

वाराणसी: नगर निगम के परिवहन विभाग में गंभीर लापरवाही और संभावित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। दस वर्ष की वैध अवधि पूरी होने से पहले ही कई नई और महंगी गाड़ियों को कागजों में ‘डेड’ घोषित कर नीलामी (स्क्रैप) सूची में शामिल कर दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने परिवहन कार्यशाला विभाग के तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

नगर आयुक्त ने पूरे प्रकरण की जांच अपर नगर आयुक्त अमित कुमार को सौंपी है और 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। निलंबन अवधि में तीनों कर्मचारियों को जांच अधिकारी से संबद्ध किया गया है।

स्थलीय निरीक्षण में खुली पोल

नीलामी समिति में शामिल उपसभापति नरसिंह दास, पार्षद हनुमान प्रसाद और मदन मोहन दुबे द्वारा डंपिंग यार्ड के स्थलीय निरीक्षण में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2022 में खरीदी गई 25 ई-गार्बेज मशीनों को महज डेढ़ साल में ही कबाड़ घोषित कर दिया गया।

एक गोल्फ कोर्ट वाहन का केवल चेसिस ही पाया गया, जबकि उसके इंजन, पहिए और बैटरी गायब थे। वहीं, 10-10 लाख रुपये की जटायु मशीनें और करीब 75 लाख रुपये की स्वीपर मशीनें बिना किसी तकनीकी या एक्सपर्ट रिपोर्ट के डंपिंग यार्ड में खड़ी मिलीं।

मरम्मत के बाद भी स्क्रैप

जांच में यह भी सामने आया कि टाटा एस की दो गाड़ियों पर 1.5 लाख रुपये से अधिक मरम्मत में खर्च किए गए, इसके बावजूद उन्हें भी स्क्रैप सूची में डाल दिया गया। वर्कशॉप में खड़ी कई गाड़ियों के सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे, जबकि नई जेसीबी और महिंद्रा वाहनों के दस्तावेज भी अधूरे मिले।

निलंबन की कार्रवाई

प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर कनिष्ठ लिपिक वैभव शरण मिश्र, सौरभ सान्याल और नपेंद्र शंकर सिंह को वाहनों के रखरखाव में घोर लापरवाही और नगर निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाने के आरोप में निलंबित किया गया है। निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कृत्य कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत है और गंभीर दंड की श्रेणी में आता है।